इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला लिया। कोर्ट ने बंदी को परीक्षा में शामिल होने के लिए अनुमति दे दिया है। कार्य ने मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस को निर्देशित भी किया है कि पूरी सुरक्षा और निगरानी में परीक्षा में बंदी शामिल होगा। बंदी ने एलएलबी सेमेस्टर एग्जाम में बैठने की अनुमति के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। जेल में बंद व्यक्ति को पुलिस हिरासत में एलएलबी प्रथम सेमेस्टर एग्जाम में बैठने की अनुमति दी। जस्टिस अताउर्रहमान मसूदी और जस्टिस नरेंद्र कुमार जौहरी की पीठ ने निर्देश दिया कि उस व्यक्ति को एग्जाम में बैठने दिया जाए और एग्जाम समाप्त होने के बाद उसे फिर से जेल में भेज दिया जाए। इसी मामले में अंजनी कुमार शुक्ला (वर्तमान में जेल/याचिकाकर्ता) राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) यूनिवर्सिटी, प्रयागराज, यूपी में नामांकित एलएलबी प्रथम सेमेस्टर का छात्र है। उसने एलएलबी सेमेस्टर एग्जाम में बैठने की अनुमति के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसे देखते हुए अपेक्षित उपस्थिति की संतुष्टि के अधीन न्यायालय ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को एलएलबी एग्जाम में बैठने की सुविधा प्रदान की जाए।
कोर्ट को जानकारी दी गई है कि प्रथम सेमेस्टर एग्जाम 12 मार्च, 14, 16, 22, 24, और 26, 2022 को निर्धारित है। अगर किसी अन्य तिथि को यूनिवर्सिटी द्वारा इन पेपरों के संबंध में परीक्षा को फिर से निर्धारित किया जा सकता है। इस संबंध में जिलाधिकारी को अवगत कराया जाएगा। इसी तरह की परिस्थितियों में मई, 2020 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक कानून के छात्र को जेल परिसर के बाहर से एक लैपटॉप प्राप्त करने की अनुमति दी थी, ताकि वह यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित ऑनलाइन एग्जाम में शामिल हो सके।
छात्र को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 और 427 के तहत दर्ज एफआईआर में आरोपी होने के कारण जेल में है। उसने आंतरिक मूल्यांकन के हिस्से के रूप में अपनी यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित की जा रहे ऑनलाइन एग्जाम में शामिल होने की अनुमति के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट ने एग्जाम में बैठने की अनुमति दे दी है।