एक तरफ कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है नैनी सेंट्रल जेल, तो दूसरी ओर क्षमता के दोगुने से अधिक हैं कैदी।
इलाहाबाद. कुख्यात माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की जेल में हुई हत्या के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा है। माफिया डान की हत्या ने एक बार फिर पूर्वांचल सहित यूपी की सियासत में अपराध और राजनीति के गठजोड़ को बल दिया है। साथ ही जेल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं। मुन्ना बजरंगी की मौत के बाद जरायम की दुनिया के उसके मशहूर किस्से हर शख्स की जुबान पर हैं। साथ ही जेलों में बंद अपराधियों नेताओं की सुरक्षा को लेकर सरकार पर भारी दबाव है। हत्याकांड के बाद नैनी जेल की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क है। नैनी जेल में बंद अपराधियों के रिकॉर्ड को देखते हुए इसे सेंसिटिव जेल माना जाता है। बावजूद इसके नैनी जेल की सुरक्षा पूरी तरह से दुरुस्त नहीं। वह भी तब जब जेल में आठ आतंकवादियों सहित कई बड़े क्रिमनल और हाई प्रोफाइल नेता बंद है।
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नैनी जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
नैनी सेंट्रल जेल हाई सिक्योरिटी जेल मानी जाती है। पर आए दिन नैनी जेल की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहते हैं। जानकारी के मुताबिक़ नैनी जेल में 281 सिपाहियों की तैनाती की आवश्कता है, पर लेकिन जेल की सुरक्षा 156 सिपाहियों के भरोसे है। नैनी जेल में 14 डिप्टी जेलर के पद स्वीकृत है, जबकि 8 पद अब भी खाली चल रहे हैं। जेल की क्षमता से ज्यादा कैदियों के सुरक्षा का दबाव भी जेल प्रशासन पर है। नैनी जेल में 2060 कैदियों को रखने की क्षमता है, लेकिन यहां पर 4000 कैदी बंद है। नैनी जेल में मंत्री नंदी के हमलावर राजेश पायलट सहित आठ खूंखार आतंकवादी बंद हैं।
By Prasoon Pandey
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