स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता की कमी और निजी अस्पतालों की बीमा कंपनियों से मिलीभगत का एक और मामला उजागर हुआ है। प्रयागराज के फीनिक्स अस्पताल में एक मरीज के इलाज का वास्तविक खर्च जहां करीब 35 हजार रुपये था, वहीं अस्पताल ने बीमा कंपनी के माध्यम से एक लाख 35 हजार 429 रुपये का बिल बनाकर वसूली की गई। मामला तब सामने आया जब मरीज के परिवार को इसकी जानकारी हुई और उन्होंने अस्पताल में हंगामा कर दिया।
Prayagraj: प्रयागराज के मांडा के गिरधरपुर निवासी भवन सामग्री व्यापारी अनिल पांडेय के बेटे अभिषेक पांडेय की एड़ी में चोट लगने के बाद उसे शुक्रवार को टैगोर टाउन स्थित फीनिक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने 40 हजार रुपये की खर्च सीमा और बीमा कार्ड के आधार पर ऑपरेशन की सहमति ली थी। इलाज के बाद रविवार को अभिषेक को डिस्चार्ज किया गया, लेकिन बिल की राशि देख परिवार हैरान रह गया। उनसे एक लाख पैतीस हजार रुपए वसूल लिए गए।
जब अस्पताल ने 1.35 लाख रुपये वसूल लिया, तो परिवार ने इलाज खर्च पर आपत्ति जताई और मरीज को तब तक अस्पताल से ले जाने से इनकार कर दिया, जब तक मामला सुलझ न जाए। पिता अनिल पांडेय ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने जार्जटाउन थाने में लिखित शिकायत दी।
सोमवार सुबह अभिषेक के समर्थन में कई लोग गिरधरपुर से अस्पताल पहुंचे और वहां हंगामा शुरू हो गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल ने गलती स्वीकार की और एक लाख रुपये का चेक मरीज के परिवार को लौटाया।
अनिल पांडेय का कहना है कि अस्पताल ने जानबूझकर बीमा कंपनी के जरिए अनावश्यक रूप से इन्फेलेटेड बिल बनाकर घोटाला किया, जो न सिर्फ धोखाधड़ी है, बल्कि आम जनता की जेब पर सीधा प्रहार है।
यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और निजी अस्पतालों की जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।