Sambhal Mosque Namaz Limit Order : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रशासन के नमाजियों की संख्या सीमित रखने वाले आदेश को रद्द कर दिया है और इस मामले पर अपना फैसला सुनाया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नमाजियों की संख्या सीमित रखने वाली DM-SP की याचिका को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह नमाजियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें। यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने दिया। कोर्ट ने आगे कहा कि अगर कोई व्यक्ति नमाजियों की नमाज में बाधा डालता है तो उसे खिलाफ कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने यह फैसला संभल के मुनाजिर खान की याचिका पर दिया।
इससे पहले पिछली सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि अगर संभल के डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके विश्नोई व्यवस्था संभालने में नाकाम हैं तो वह इस्तीफा दे दें या फिर अपना ट्रांसफर ले लें।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, यह राज्य का कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा कर सके। अगर वह निजी संपत्ति है, तो राज्य से किसी इजाजत की जरूरत नहीं। कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि राज्य का दखल सिर्फ वहीं जरूरी है, जहां प्रार्थना या धार्मिक काम सार्वजनिक भूमि पर आयोजित किए जाने हों।
संभल प्रशासन निर्देश दिया था कि रमजान के दौरान मस्जिदों में संख्या सीमित रखें, एक बार में 15 से 20 लोग बी नमाज अदा करें। इस आदेश के खिलाफ संभल के रहने वाले मुनाजिर खान ने हाईकोर्ट में 18 मार्च को याचिका दाखिल की और प्रशासन को चुनौती दी। इस मामले में पहली सुनवाई 27 फरवरी को हुई। आज सोमवार को इस मामले में हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संभल प्रशासन को फटकार लगाई थी।
सरकारी वकील ने कोर्ट में कहा कि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए नमाजियों की संख्या को सीमित करने का यह आदेश दिया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार के वकील की दलील खारिज कर दी।