Satua Baba Interview: सतुआ बाबा, विष्णु पीठ के पीठाधीश्वर, प्रयागराज माघ मेले में श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने हैं।
Satua Baba Exclusive: प्रयागराज में माघ मेले की चमक चारों ओर बिखरी हुई है। आम नागरिकों के साथ साधु संत भी इस पर्व का हिस्सा बन रहे हैं। धर्म की इस धरा पर एक ऐसा भी नाम है, जो लगातार चर्चा में बना हुआ है। वो नाम है विष्णु पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु सतुआ बाबा। सतुआ बाबा इस समय माघ मेले का केंद्रबिंदु बने हुए हैं।
विष्णु पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु सतुआ बाबा इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाने वाले बाबा ने बताया कि कैसे 1998 के भीषण अभाव से निकलकर आज सनातन धर्म और आधुनिक विकास का संगम हो रहा है।
माघ मेले में खाकचौक समिति पर विराजमान जगद्गुरु सतुआ बाबा की तीन करोड़ की डिफेंडर गाड़ी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। तीन करोड़ी कार के सवाल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि साधन किसी संत को बड़ा या छोटा नहीं बनाते, बल्कि उसकी सोच महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि जब से देश की सत्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संभाली है, भारत विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है और संत समाज भी इसी विकास के साथ अध्यात्म का संदेश दे रहा है।
बाबा ने 'सतुआ बाबा' नाम के पीछे के संघर्षमयी इतिहास को साझा करते हुए बताया कि 1998 में विष्णु पीठ की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी। उस समय मठ में भोजन तक की व्यवस्था नहीं थी और साधक केवल सतुआ पीकर ही जीवन यापन करते थे, जिसके कारण यह नाम प्रचलन में आया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'सतुआ बाबा' कोई व्यक्तिगत नाम नहीं, बल्कि विष्णु पीठ में पीठाधीश्वर का एक गरिमामय पद है।
महज 11 साल की उम्र में संन्यास लेने वाले सतुआ बाबा का मानना है कि युवा भारत को सनातन धर्म से जोड़कर ही राष्ट्र का समग्र विकास संभव है। उन्होंने आध्यात्मिक चेतना के साथ भौतिक विकास के समन्वय पर जोर दिया। सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी भारत या उत्तर प्रदेश की ओर आंख उठाकर देखेगा, उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। बाबा के अनुसार, गुरु की कृपा और सनातन समाज का अटूट विश्वास ही उनकी असली शक्ति है।