प्रयागराज

शंकराचार्य पद पर विवाद गहराया, प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजा

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर यूपी सरकार और प्रशासन सख़्त रुख में दिखाई दे रहे हैं। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने माघ मेला शिविर में शंकराचार्य शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की अवहेलना बताया है।
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प्रयागराज मेला प्राधिकरण का नोटिस, शंकराचार्य पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना का आरोप (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
प्रयागराज मेला प्राधिकरण का नोटिस, शंकराचार्य पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना का आरोप (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Swami Avimukteshwaranand: उत्तर प्रदेश सरकार और ज्योतिष्पीठ से जुड़े शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक औपचारिक नोटिस जारी करते हुए उनके द्वारा स्वयं को शंकराचार्य घोषित किए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है। यह नोटिस माघ मेला क्षेत्र में लगाए गए उनके शिविर के बोर्ड पर ‘शंकराचार्य’ शब्द के प्रयोग को लेकर भेजा गया है, जिसे प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना की श्रेणी में रखा है।

माघ मेला शिविर बना विवाद की वजह

प्रयागराज में आयोजित माघ मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जहाँ लाखों श्रद्धालु, संत और धर्माचार्य एकत्र होते हैं। इसी मेला क्षेत्र में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का शिविर स्थापित है। मेला प्राधिकरण के अनुसार, शिविर के बाहर लगाए गए बोर्ड में उन्हें “ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य” के रूप में दर्शाया गया है। इसी शब्दावली को लेकर प्रशासन ने आपत्ति जताते हुए नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि शंकराचार्य पद से संबंधित मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में किसी भी व्यक्ति द्वारा स्वयं को शंकराचार्य घोषित करना न्यायालय की प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना जा सकता है।

नोटिस में क्या कहा गया है

प्रयागराज मेला प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है-“शंकराचार्य पद का मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जब तक इस विषय में कोई स्पष्ट आदेश पारित नहीं होता, तब तक धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में किसी भी व्यक्ति का पट्टाभिषेक अथवा सार्वजनिक घोषणा नहीं की जा सकती। इसके बावजूद माघ मेला शिविर के बोर्ड में आपने स्वयं को शंकराचार्य घोषित कर रखा है, जो माननीय सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना है।”

नोटिस में आगे कहा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करना होगा कि ‘शंकराचार्य’ शब्द का प्रयोग किस आधार पर किया जा रहा है। समय सीमा के भीतर संतोषजनक उत्तर न मिलने की स्थिति में आगे की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित है शंकराचार्य पद का मामला

गौरतलब है कि ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य पद को लेकर विवाद लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में है। इस पद पर वैधानिक मान्यता, उत्तराधिकार और नियुक्ति को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति द्वारा स्वयं को आधिकारिक रूप से शंकराचार्य घोषित करना सब ज्यूडिस मामले के अंतर्गत आता है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायालय में लंबित किसी विषय पर सार्वजनिक रूप से दावा करना या पद का उपयोग करना अदालत की अवमानना माना जा सकता है। इसी आधार पर मेला प्राधिकरण ने यह कदम उठाया है।

सरकार और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच बढ़ता तनाव

राजनीतिक और धार्मिक हलकों में इस नोटिस को यूपी सरकार और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच बढ़ते तनाव के रूप में देखा जा रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इससे पहले भी कई बार सरकार की नीतियों, धार्मिक मुद्दों और सामाजिक विषयों पर खुलकर बयान दे चुके हैं। ऐसे में यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक न होकर राजनीतिक संकेत भी मानी जा रही है।

संत समाज में मतभेद

इस मामले को लेकर संत समाज भी दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। एक वर्ग का कहना है कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है, तब तक किसी को भी शंकराचार्य पद का सार्वजनिक उपयोग नहीं करना चाहिए। वहीं, दूसरा वर्ग इसे धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं में सरकारी हस्तक्षेप बता रहा है।

कुछ संतों का तर्क है कि शंकराचार्य पद केवल कानूनी नहीं, बल्कि धार्मिक परंपरा से भी जुड़ा हुआ है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि जब विषय न्यायालय में है, तो सभी को कानून और न्यायिक मर्यादा का पालन करना होगा।

मेला प्राधिकरण की दलील

प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि माघ मेला एक अत्यंत संवेदनशील धार्मिक आयोजन है, जहाँ किसी भी प्रकार का भ्रम या विवाद व्यवस्था और शांति को प्रभावित कर सकता है। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में यदि न्यायालय की अवहेलना से जुड़ा कोई मामला सामने आता है, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन पर आती है। इसलिए नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाना आवश्यक है।

आगे की कार्रवाई पर नजर

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस नोटिस का क्या जवाब देते हैं। यदि वे तय समयसीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हैं, तो मामला यहीं समाप्त हो सकता है। लेकिन यदि जवाब अस्वीकार्य रहा, तो मेला प्राधिकरण द्वारा शिविर, बोर्ड या अन्य व्यवस्थाओं को लेकर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

Updated on:
20 Jan 2026 11:41 am
Published on:
20 Jan 2026 11:41 am
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