प्रयागराज

World Autism Awareness Day: गजब की है याददाश्त लेकिन अपनों से आंख मिलाने में डरता है मासूम, जानें क्या है ऑटिज्म ?

अगर बच्चा एक ही बात को बार बार दोहराता है और अपनों से आंख मिलाने में डरता है तो सावधान होने की जरूरत है। आज विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के मौके पर जानिए क्या है ऑटिज्म के लक्षण और उपचार?
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world autism day
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World Autism Awareness Day: प्रयागराज से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 4 साल का बच्चा अपनी उम्र के बच्चों से कहीं ज्यादा तेज दिमाग का निकला। जब डॉक्टरों ने उससे उसकी उम्र पूछी तो उसने न केवल अपनी जन्मतिथि बताई बल्कि पैदा होने का दिन और सटीक समय भी बता दिया। यह देखकर डॉक्टर भी दंग रह गए। हालांकि इस असाधारण प्रतिभा के पीछे 'ऑटिज्म' नाम की एक बीमारी छिपी हुई है जिसको लेकर माता-पिता को सतर्क रहने की जरूरत है।

बड़े-बड़ों से भी तेज है दिमाग

विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के मौके पर प्रयागराज के अस्पताल में एक महिला अपने बच्चे को लेकर पहुंची। बच्चे की जांच के दौरान उसके शार्प माइंड के कई उदाहरण देखने को मिले। जब उसे मोबाइल पर मशहूर अभिनेत्री 'प्रीति जिंटा' की फोटो दिखाई गई तो उसने पलक झपकते ही उनका नाम बता दिया। आम तौर पर बच्चों को ऐसी बातें याद रखने में समय लगता है लेकिन यह बच्चा सामान्य से बहुत तेज निकला।

माता-पिता हैं परेशान

लेकिन बच्चे के माता-पिता खुश होने के बजाय परेशान हैं। मां ने बताया कि बच्चा पढ़ाई में मन नहीं लगा पाता। वह दूसरों से आंख मिलाकर बात नहीं करता और अजीब-अजीब सी आवाजें निकालता है। जब उसे कोई पुकारता है तो वह प्रतिक्रिया नहीं देता और अपने आप में ही खोया रहता है। उसका सामाजिक व्यवहार सामान्य बच्चों जैसा नहीं है जो माता-पिता के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

क्या कहते हैं डॉक्टर?

एक समाचार पत्र से बातचीत के दौरान अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. राकेश पासवान और मनोवैज्ञानिक डॉ. पंकज कोटार्य ने बताया कि मेडिकल की भाषा में इसे 'न्यूरो डेवलपमेंट डिसऑर्डर' या ऑटिज्म कहते हैं। ऑटिज्म के एक रूप में बच्चा बहुत तेज बुद्धि का हो सकता है लेकिन वह समाज से कट जाता है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर समय पर इलाज और थेरेपी न मिले तो युवावस्था तक आते-आते ऐसे बच्चों का व्यवहार काफी असामाजिक हो सकता है।

स्पीच और बिहेवियर थेरेपी है इलाज

डॉक्टरों ने बच्चे के माता-पिता को स्पीच थेरेपी और व्यवहार सुधारने वाली थेरेपी कराने की सलाह दी है। इससे बच्चा लोगों के बीच रहना, बात करना और सही तरीके से व्यवहार करना सीखेगा। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के लिए यह थेरेपी बहुत जरूरी होती है ताकि वे भविष्य में सामान्य जीवन जी सकें। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामले दुर्लभ होते हैं लेकिन सही देखभाल से सुधार संभव है।

Updated on:
02 Apr 2026 02:55 pm
Published on:
02 Apr 2026 02:55 pm
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