
Minor Rape Case Pune: महाराष्ट्र के पुणे जिले से एक बड़ा फैसला आया है। नसरापुर गांव में 3 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या के आरोपी भीमराव कांबले को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। 26 जून को विशेष अदालत ने उसे दोषी करार दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि कांबले ने मासूम बच्ची के साथ पूरे 39 मिनट तक बर्बरता की थी। आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड पुराना है और उस पर पहले भी कई मामले दर्ज थे।
पीड़ित पक्ष के वकील विपुल दुशिंग ने बताया, किसी अपराधी को फांसी देने के लिए जितने भी कानूनी पैमानों की जरूरत होती है, वे सब इस मामले में पूरे हुए हैं। अपराध का तरीका बेहद क्रूर था। आरोपी ने सिर्फ अपनी हवस के लिए इस घटना को अंजाम दिया। इसी बर्बरता को देखते हुए कोर्ट ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मामला माना और मौत की सजा सुनाई।
यह दिल दहला देने वाली घटना 1 मई 2026 को हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए फास्ट-ट्रैक कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई। आरोपी भीमराव कांबले बच्ची को खाने की चीजें दिलाने और गाय का बछड़ा दिखाने का झांसा देकर अपने साथ ले गया था। वह उसे मवेशियों के बाड़े के पास एक शेड में ले गया, जहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने बच्ची का मुंह दबाकर और उसकी छाती पर गंभीर चोटें पहुंचाकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। बाद में उसने शव को छिपाकर सबूत मिटाने की भी कोशिश की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने 28 मई से इस पर रोज (डे-टू-डे) सुनवाई करने का फैसला किया था। विशेष लोक अभियोजक (सरकारी वकील) अजय मिसर ने कोर्ट को बताया था कि आरोपी मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है और सजा पाने के लायक है। उन्होंने कोर्ट में आरोपी की मेडिकल रिपोर्ट और 82 गवाहों की लिस्ट पेश की थी।
26 जून को एडिशनल सेशन जज एस.आर. सालुंखे ने आरोपी भीमराव कांबले को अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का दोषी माना। सरकारी वकील अजय मिसर के मुताबिक, अभियोजन पक्ष ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट समेत सभी आरोपों को कोर्ट में साबित किया। आरोपी को फांसी की सजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के 12 पुराने ऐतिहासिक फैसलों का हवाला भी दिया गया।
अदालत में कुछ बच्चों ने गवाही दी, जिन्होंने आरोपी को बच्ची को ले जाते हुए देखा था। बच्चों ने पहचान परेड में आरोपी की साफ पहचान की। सरकारी वकील ने कोर्ट से मौत की सजा की मांग करते हुए कहा कि कांबले के सुधरने या समाज में वापस लौटने की कोई गुंजाइश नहीं है। उसके खिलाफ पहले भी एक बुजुर्ग महिला, एक किशोरी और मवेशी से क्रूरता के मामले दर्ज हैं। वह समाज के लिए एक बड़ा खतरा है, इसलिए उसे जिंदा रहने का कोई अधिकार नहीं है।