पुणे

32 घंटे का कहर! मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे जाम में फंसे 1.2 लाख लोग, अब मिलेगा ₹5.16 करोड़ का रिफंड

Mumbai Pune Expressway jam: 3 फरवरी 2026 को मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 32 घंटे के ट्रैफिक जाम में फंसे 1.2 लाख यात्रियों को राहत देते हुए ₹5.16 करोड़ टोल टैक्स उनके FASTag खातों में वापस किया जाएगा।

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Feb 22, 2026
People stuck in Mumbai Pune Expressway jam will get toll tax refund

Mumbai Pune Expressway jam:मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 3 फरवरी 2026 को महाजाम में फंसे लोगों को राहत मिलने जा रही है। दरअसल, एक्सप्रेसवे पर 32 घंटे तक चले भीषण ट्रैफिक जाम फंसे करीब 1.2 लाख यात्रियों को टोल टैक्स वापस करने का फैसला किया है। अधिकारियों के अनुसार, कुल ₹5.16 करोड़ की राशि प्रभावित यात्रियों के FASTag खातों में अगले सप्ताह तक ट्रांसफर कर दी जाएगी। यह लंबा ट्रैफिक जाम खोपोली के पास एक गैस टैंकर के पलटने के बाद लगा था, जिससे एक्सप्रेसवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। हजारों वाहन घंटों तक सड़क पर फंसे रहे और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

आदेश से पहले कटा टोल, अब होगा रिफंड

MSRDC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद टोल वसूली रोकने के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन आदेश पूरी तरह लागू होने से पहले कई वाहनों के FASTag खातों से शुल्क कट गया। ऐसे सभी मामलों की पहचान कर रिफंड देने का निर्णय लिया गया है। रिफंड में एक्सप्रेसवे के साथ-साथ पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर वसूले गए टोल को भी शामिल किया जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए MSRDC ने अपने कंसेशनायर IRB Infrastructure से FASTag ट्रांजेक्शन का विस्तृत डेटा मंगाया है, ताकि सभी प्रभावित यात्रियों तक सही तरीके से राशि लौटाई जा सके।

घंटों जाम में फंसे लोग, बढ़ा आक्रोश

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, टोल प्लाजा के बैरियर पूरी तरह खुलने तक कुछ लेन-देन होते रहे, जिस कारण यात्रियों के खातों से पैसा कटता रहा। इस दौरान कई यात्रियों को अपने कार्यक्रम रद्द करने पड़े, जबकि कुछ लोगों को भोजन, पानी और ईंधन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ा। खालापुर टोल प्लाजा पर टोल वसूली जारी रहने की खबर सामने आने के बाद लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली।

विपक्ष और उपभोक्ता संगठनों का दबाव

इस मुद्दे को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी सरकार पर दबाव बनाया। राज ठाकरे समेत कई नेताओं ने MSRDC, IRB और ट्रैफिक पुलिस से प्रभावित यात्रियों को तुरंत रिफंड देने की मांग की थी। वहीं, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत और ऑल इंडिया कंज्यूमर राइट्स ऑर्गेनाइजेशन ने MSRDC और आपदा प्रबंधन अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजकर जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है।

भविष्य की तैयारियों पर सवाल

इस घटना ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपात स्थिति प्रबंधन और टोल वसूली प्रणाली की कमियों को उजागर किया है। हालांकि MSRDC के फैसले से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट और मजबूत आपदा प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना बेहद जरूरी है।