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पुणे के इंफोसिस कैंपस में हाई अलर्ट! NSG और अमरीकी कमांडो की मॉक ड्रिल देख लोग रह गए हैरान, फिर सामने आई असली वजह

Infosys Campus Security: पुणे के हिंजेवाड़ी स्थित इंफोसिस कैंपस में NSG, अमरीकी कमांडो और पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस ने संयुक्त एंटी-टेरर मॉक ड्रिल की। जानिए इस हाई सिक्योरिटी अभ्यास का मकसद और इसमें क्या-क्या हुआ।
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पुणे

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Imran Sheikh

Aug 06, 2026

Pune Infosys Campus Mock Drill

पुणे के इंफोसिस कैंपस में एक्शन मोड में सुरक्षा बल। (फोटो सोर्स-ANI)

Infosys Campus Security: पुणे के हिंजेवाड़ी स्थित इंफोसिस कैंपस में गुरुवार को अचानक हलचल तेज हो गई। चारों तरफ सुरक्षा जवान दौड़ते नजर आए, कमांडो मोर्चा संभालते दिखे और पूरे इलाके में हाई अलर्ट जैसा माहौल बन गया। वहां मौजूद कई लोगों को लगा कि शायद कोई बड़ा आतंकी खतरा सामने आ गया है। लेकिन कुछ ही देर बाद साफ हो गया कि यह असली हमला नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की एक बड़ी मॉक ड्रिल थी।

इस अभ्यास में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG), अमरीकी कमांडो, पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर हिस्सा लिया। इस ड्रिल का मकसद यह देखना था कि अगर किसी बड़े आईटी कैंपस या भीड़भाड़ वाली जगह पर आतंकी हमला या कोई बड़ी आपात स्थिति पैदा हो जाए, तो सुरक्षा बल कितनी तेजी और बेहतर तालमेल के साथ कार्रवाई कर सकते हैं।

घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की तैयारी

मॉक ड्रिल के दौरान कई तरह की परिस्थितियां बनाई गईं। कहीं संदिग्ध लोगों की तलाश की गई तो कहीं लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास हुआ। कमांडो ऑपरेशन, घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की तैयारी और अलग-अलग टीमों के बीच तालमेल भी परखा गया। अधिकारियों ने यह भी देखा कि संकट के समय सूचना एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी तक कितनी जल्दी पहुंचती है और फैसले कितनी तेजी से लिए जाते हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की ड्रिल समय-समय पर कराई जाती है ताकि किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियां बिना घबराए तुरंत कार्रवाई कर सकें। पुणे देश का बड़ा आईटी हब है, जहां हजारों लोग रोज काम करते हैं। ऐसे में यहां की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखना बेहद जरूरी माना जाता है।

अमरीकी कमांडो भी शामिल रहे

इस अभ्यास की सबसे खास बात यह रही कि इसमें अमरीकी कमांडो भी शामिल हुए। इससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली रणनीतियों और तकनीकों को समझने का मौका मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते सुरक्षा खतरों को देखते हुए अलग-अलग एजेंसियों का एक साथ अभ्यास करना आज की जरूरत बन गया है।

इस मॉक ड्रिल का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो देखकर कई लोगों ने पहले इसे असली घटना समझ लिया, लेकिन बाद में पता चला कि यह केवल सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए किया गया अभ्यास था। अधिकारियों ने साफ किया कि इस तरह की ड्रिल का उद्देश्य लोगों में डर पैदा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मुश्किल हालात में सुरक्षा एजेंसियां हर चुनौती का मजबूती से सामना कर सकें।