
Pune Infrastructure News: कभी आधुनिक तकनीक और स्मार्ट शहर की पहचान मानी जाने वाली पुणे की पहली 20 मंजिला ऑटोमैटिक पार्किंग अब इतिहास बनने जा रही है। जिस परियोजना को शहर की पार्किंग समस्या का बड़ा समाधान बताया गया था, वही आज सालों से बंद पड़ी है। लगातार तकनीकी खराबी और रखरखाव की मुश्किलों के चलते पुणे नगर निगम ने आखिरकार इसे तोड़ने का फैसला कर लिया है।
यह हाईटेक पार्किंग साल 2007 में संभाजी गार्डन के पास बनाई गई थी। उस समय इसे शहर के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना गया था। करीब 2.5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस ऑटोमैटिक पार्किंग में कम जगह में 60 कारें खड़ी करने की सुविधा थी। उम्मीद थी कि इससे शहर के व्यस्त इलाके में पार्किंग की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी और लोगों को आधुनिक सुविधा मिलेगी।
हालांकि, यह उम्मीद ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी। शुरू होने के कुछ साल बाद ही पार्किंग की मशीनों में तकनीकी दिक्कतें आने लगीं। करीब पांच साल बाद सिस्टम में ऐसी खराबी आई कि पूरी पार्किंग बंद करनी पड़ी। इसके बाद इसे दोबारा शुरू करने की कई बार कोशिश हुई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। देखते ही देखते यह महत्वाकांक्षी परियोजना बंद पड़ी इमारत में बदल गई।
नगर निगम का कहना है कि इस पार्किंग की मरम्मत और संचालन के लिए विशेषज्ञ एजेंसी तलाशने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन कोई भी संस्था इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए आगे नहीं आई। ऐसे में अब इसे दोबारा चालू करना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है। इसी कारण इसे हटाने का फैसला लिया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, सालों से बंद पड़ी इस पार्किंग के रखरखाव पर भी खर्च हो रहा है, जबकि इससे लोगों को कोई फायदा नहीं मिल रहा। इसलिए अब इस जगह का बेहतर और उपयोगी तरीके से इस्तेमाल करने की योजना बनाई जाएगी। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि पार्किंग हटने के बाद वहां कौन-सी नई सुविधा विकसित की जाएगी।
यह मामला सिर्फ एक इमारत के टूटने का नहीं है, बल्कि यह भी बताता है कि किसी भी आधुनिक परियोजना की सफलता केवल नई तकनीक पर नहीं, बल्कि उसके नियमित रखरखाव और बेहतर संचालन पर भी निर्भर करती है। अगर समय रहते तकनीकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाए, तो करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी परियोजनाएं बेकार साबित हो सकती हैं।
अब शहर के लोगों की नजर इस बात पर है कि इस जगह पर आगे क्या बनाया जाएगा और क्या नई योजना वास्तव में पुणे की पार्किंग और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगी।