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Pune: जीवनभर बनी रहीं बूढ़ी मां का सहारा, मौत के बाद भी वो ‘बेटी’ चार चेहरों पर जिंदगी की मुस्कान दे गई!

Pune organ donation woman; बूढ़ी मां की सेवा के लिए जीवनभर अविवाहित रहीं दौंड (पुणे) की 40 साल की महिला ने मृत्यु के बाद भी 4 लोगों को जिंदगी का तोहफा दिया। सड़क हादसे में ब्रेन डेड होने के बाद परिवार ने अंगदान कर समाज के सामने एक अनोखा आदर्श पेश किया है।
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पुणे

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Imran Ansari

Jul 14, 2026

Pune organ donation woman

AI से बनाया गया प्रतीकात्मक फोटो

Pune organ donation woman: अपनी बूढ़ी मां की जिम्मेदारी संभालने के लिए जीवनभर शादी न करने का फैसला लेने वाली दौंड (पुणे) की एक 40 वर्षीय महिला बीमा प्रतिनिधि (इंश्योरेंस एजेंट) ने मौत के बाद भी मानवता का ऐसा आदर्श पेश किया है, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हैं। एक सड़क हादसे में 'ब्रेन डेड' (मेंदूमृत) घोषित होने के बाद, गमगीन परिवार ने हौसला दिखाते हुए उनके अंगदान का ऐतिहासिक फैसला लिया। महिला के लीवर (यकृत), दोनों किडनी (मूत्रपिंड) और फेफड़ों (फुफ्फुस) के दान से चार गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला है।

मां के लिए नहीं की शादी, हादसे ने छीन ली जिंदगी

इस जांबाज बेटी की पूरी जिंदगी निस्वार्थ भावना और कर्तव्य के प्रति समर्पण की मिसाल रही। दोनों बड़ी बहनों की शादी के बाद पिता का असमय निधन हो गया था। इसके बाद मां अकेली न पड़ जाए, इसलिए उन्होंने जीवनभर विवाह न करने का संकल्प लिया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; एक दर्दनाक सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गईं।

उन्हें 7 जुलाई को इलाज के लिए 'नोबल हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च सेंटर' में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बाद भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और 9 जुलाई को उन्हें डॉक्टरों की टीम द्वारा 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया गया। इकलौती बेटी की मौत से मां पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन इस बेहद कठिन समय में भी परिवार ने अंगदान का साहसी फैसला लेकर दूसरों के जीवन में उम्मीद की किरण जगाई।

ग्रीन कॉरिडोर के जरिए पहुंचाए गए अंग

10 जुलाई को नोबल हॉस्पिटल के डॉक्टरों की टीम ने अंग निकालने (ऑर्गन रिट्रिव्हल) की सफल सर्जरी की। अस्पताल के ग्रुप सीईओ डॉ. संजय पठारे ने बताया कि दानदाता महिला के फेफड़े, लीवर और दोनों किडनी सुरक्षित निकाली गईं।

लीवर और पहली किडनी

नोबल हॉस्पिटल में ही भर्ती लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक 59 वर्षीय पुरुष और किडनी फेलियर से पीड़ित 49 वर्षीय महिला में इनका सफल प्रत्यारोपण (Transplant) किया गया।

दूसरी किडनी और फेफड़े

इन अंगों को झेडटीसीसी (ZTCC) के माध्यम से ट्रैफिक पुलिस की मदद से 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाकर पुणे के अन्य अस्पतालों में भर्ती मरीजों तक समय रहते पहुंचाया गया। इस पूरी जटिल प्रक्रिया को सफल बनाने में लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. मनोज श्रीवास्तव, डॉ. स्मिता पारख, किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. विक्रम सातव और मेडिकल सोशल वर्कर व ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर महेश तुपे की टीम ने मुख्य भूमिका निभाई।

ऐसी असाधारण उदारता को हमारा सलाम- डॉ. दिविज माने

नोबल हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च सेंटर के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दिविज माने ने पीड़ित परिवार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि अत्यंत दुख की घड़ी में भी दानदाता के परिवार ने अपने व्यक्तिगत दुख से ऊपर उठकर अंगदान का फैसला लिया। हम उनकी इस असाधारण उदारता और हौसले को मन से सलाम करते हैं। साथ ही, इस जीवनदायी प्रक्रिया को समय पर पूरा करने में मदद करने वाली ZTCC पुणे, ग्रीन कॉरिडोर बनाने वाली ट्रैफिक पुलिस और हमारी पूरी मेडिकल टीम का दिल से आभार।

बेटी के जाने का गम मां के लिए सहना नामुमकिन है, लेकिन आज संतोष इस बात का है कि दुनिया से जाने के बाद भी उनकी बेटी चार लोगों के रूप में इस दुनिया में जिंदा है। यह घटना साबित करती है कि मौत के बाद भी इंसान अंगदान के जरिए कई परिवारों के बुझते हुए चिरागों को रौशन कर सकता है

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