पुणे

पति ने शारीरिक संबंध से किया इनकार, पत्नी की शिकायत पर अदालत ने सुनाया फैसला

Pune News: पुणे कोर्ट में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां पत्नी के गंभीर आरोपों के बाद दोनों पक्षों की सहमति से शादी को नाम मात्र का मानते हुए अदालत ने उसे रद्द कर दिया।
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Feb 20, 2026
Wife approaches court against husband in Pune Maharashtra

Pune News: महाराष्ट्र के पुणे कोर्ट में अक्सर अलग-अलग मामले सामने आते रहते हैं। इसी क्रम में एक और हैरान करने वाला मामला कोर्ट में आया। दरअसल, एक महिला का आरोप था कि उसका पति उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाता था और यह शादी केवल नाम मात्र की रह गई है। महिला का आरोप इतना गंभीर था कि दोनों पक्षों की सहमति के बाद कोर्ट को इस शादी को रद्द करना पड़ा।

इस केस की सुनवाई के दौरान पत्नी ने जज साहब से कहा कि शादी के बाद हम दोनों ने एक साथ पति-पत्नी की तरह रहने की लाख कोशिश की, लेकिन पति हमेशा दूरी ही बनाता था। पत्नी का आरोप है कि शादी के बाद उन दोनों के बीच एक बार भी शारीरिक संबंध नहीं बना है। पत्नी का कहना है कि कई साल बीत जाने के बाद भी पति की हरकतें नहीं सुधरीं, तो उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इतना ही नहीं, पति ने इस बात को स्वीकार कर लिया कि वह पत्नी के साथ संबंध नहीं बनाता है। पति के इसी बयान के आधार पर कोर्ट ने फैसला कर लिया कि अब इस शादी को यहीं पर खत्म कर देना चाहिए।

पति का पत्नी में नहीं थी दिलचस्पी

मिली जानकारी के अनुसार, दोनों दंपति की शादी पंजीकृत विवाह के रूप में हुई थी। दोनों के परिवार इस शादी से बेहद खुश थे और दुल्हन भी अपने पति के साथ ससुराल में रहने लगी। लेकिन पहले पत्नी को लगा कि पति शरमा रहा है; कुछ दिन में सब ठीक हो जाएगा। लेकिन महीना बीतने के बाद भी पति उससे दूर-दूर ही रहता था। धीरे-धीरे समय बीतता गया और पत्नी को एहसास हो गया कि पति उसके साथ नहीं रहना चाहता है। पत्नी ने लाख सुधारने की कोशिश की लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ और आखिर में वह अपने माइके लौट गई।

पति ने स्वीकार किया आरोप

कोर्ट की सुनवाई के दौरान पति ने लिखित बयान के माध्यम से स्वीकार किया कि विवाह के बाद दोनों के बीच कभी भी सहमति से शारीरिक संबंध स्थापित नहीं हो पाए। मामले में जब यह स्पष्ट हो गया कि तथ्यों को लेकर दोनों पक्षों के बीच कोई विवाद नहीं है और प्रतिवादी स्वयं अपनी गलती स्वीकार कर रहा है, तो अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों का सहारा लिया। इन प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों में लंबी गवाही और विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता नहीं होती। इसी आधार पर जज बी. डी. कदम ने सभी तथ्यों पर विचार करते हुए विवाह को विधिक रूप से निरस्त घोषित कर दिया और मामले का निपटारा कर दिया।

Updated on:
21 Feb 2026 12:35 pm
Published on:
20 Feb 2026 07:35 pm