
Bharat Tiwari Encounter Case Update: बिहार के भोजपुर जिले में 17 जून को हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर (Bharat Tiwari Encounter) मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई (Bharat Tiwari Encounter Case Hearing) होगी। भोजपुर में हुए इस एनकाउंटर ने पूरे बिहार राज्य में सुर्खियां बटोरी थीं। अब मामले की कानूनी प्रक्रिया शीर्ष अदालत पहुंच गई है। भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में उत्तर प्रदेश के एक युवक के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में भोजपुर पुलिस एक्शन में है। भोजपुर पुलिस ने एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। इसी क्रम में पुलिस ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी दीपक दीक्षित उर्फ पंडित के खिलाफ आरा साइबर थाने में FIR दर्ज की है।
पुलिस के अनुसार, दीपक लगातार विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक, धमकी भरे और भड़काऊ बयान दे रहा था। दीपक पर धमकियां देने और मामले को भड़काने के लिए उकसावे का आरोप है।
भोजपुर पुलिस के एसपी राज ने बताया कि दीपक दीक्षित ने शाहपुर थाना क्षेत्र में हुए एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर पुलिस अधिकारियों को खुलेआम जान से मारने की धमकी दी थी। इसके साथ ही लोगों को पुलिस के खिलाफ भड़काने और हिंसा के लिए उकसाने का प्रयास किया।
पुलिस इसे कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने और पुलिस के खिलाफ सुनियोजित अभियान का हिस्सा मान रही है। इस मामले में आरोपी पर भय का वातावरण बनाने और अधिकारियों के खिलाफ हिंसा भड़काने का गंभीर आरोप है। भोजपुर पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे ऐसे भड़काऊ कंटेंट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भोजपुर में 17 जून को हुए भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद जिले में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बयानों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इसके साथ ही लोग पुलिस की जमकर आलोचना कर रहे हैं। ऐसे माहौल में पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच CBI से कराने की मांग की गई है। वकील विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। याचिका में निष्पक्ष जांच के लिए इस मामले को CBI को सौंपने की मांग की है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई है।