BJP MLA Big Statement: बिजली शिविर में माहौल जब गरमाया जब BJP विधायक ने SDO पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर तीखी नाराजगी जताई। जानिए पूरा मामला क्या है?
BJP MLA Big Statement: उत्तर प्रदेश के रायबरेली के सलोन क्षेत्र में बिजली समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित मेगा शिविर उस वक्त विवादों में आ गया, जब भाजपा विधायक अशोक कुमार कोरी (Ashok Kumar Kori) अधिकारियों पर भड़क उठे। ब्लॉक सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मौजूद लोगों के सामने ही विधायक ने बिजली विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर तीखी नाराजगी जताई।
कार्यक्रम के दौरान विधायक अशोक कोरी ने छतोह के SDO ध्रुवचंद्र जायसवाल (Dhruvchandra Jaiswal) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अत्यधिक घूसखोरी हो रही है और इससे सरकार की छवि खराब हो रही है। विधायक ने चीफ इंजीनियर से सीधे कहा कि ऐसे अधिकारियों को क्षेत्र से हटाया जाए, क्योंकि उनके खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं। विधायक ने कहा, '' इतनी घूसखोरी जिसकी कोई हद नहीं। इन्होंने नर्क मचा दिया है और ये योगी सरकार की भद पिटवा रहे हैं, ऐसे अधिकारी हमारे क्षेत्र में नहीं चाहिए। इन्हें यहां से हटाइए।''
अशोक कोरी ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी ना तो जनप्रतिनिधियों का सम्मान करते हैं और ना ही शासन की मंशा के अनुरूप काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, '' ये तो विधायक को विधायक नहीं समझते'', जिससे उनकी नाराजगी साफ झलक रही थी। उनके इस बयान से कार्यक्रम में मौजूद अधिकारी और कर्मचारी भी असहज नजर आए।
विधायक के तेवर देख मौके पर मौजूद आम लोग भी उनके समर्थन में उतर आए। बिजली समस्याओं को लेकर पहले से परेशान लोग हल्ला-गुल्ला करने लगे और अधिकारियों के खिलाफ आवाज उठाने लगे, जिससे माहौल और ज्यादा गर्म हो गया।
विधायक ने विजिलेंस टीम की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि चेकिंग के नाम पर गरीबों का उत्पीड़न किया जा रहा है, जो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अवैध वसूली बंद नहीं हुई, तो इसकी शिकायत सीधे शासन स्तर पर की जाएगी।
बताया जा रहा है कि यह मेगा शिविर बुधवार को आयोजित हुआ था, लेकिन मामला दबा रहा। जैसे ही इस घटना का वीडियो सामने आया, यह मामला चर्चा में आ गया और तेजी से फैल गया।
इस पूरे मामले पर SDO ध्रुवचंद्र जायसवाल ने अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बैठक में कोई भी कुछ भी कह सकता है और जनप्रतिनिधियों को अगर किसी काम से नाराजगी है, तो वह उनकी व्यक्तिगत राय हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वह पूरी ईमानदारी और निष्ठा से अपना कार्य कर रहे हैं और यदि आरोप हैं, तो उनके समर्थन में ठोस साक्ष्य भी पेश किए जाने चाहिए।