रायबरेली

गढ़ बचाने घर-घर जाएंगे कार्यकर्ता, प्रियंका गांधी ने तैयारी की रणनीति

रायबरेली-अमेठी की पहचान कांग्रेस के गढ़ के तौर पर है। इस गढ़ में कांग्रेस को घेरने की कोशिश में जुटे हैं अमित शाह

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priyanka gandhi

रायबरेली/अमेठी. रायबरेली-अमेठी की पहचान कांग्रेस के गढ़ के तौर पर है। इस गढ़ में कांग्रेस को घेरने की कोशिश में जुटे अमित शाह के दांव को फेल करने के लिए प्रियंका गांधी ने कमर कस ली है। सूत्रों की मानें तो प्रियंका ने रायबरेली-अमेठी के लिए खास रणनीति तैयार की है जिसके आधार पर कार्यकर्ता लोगों के घरों तक पहुंचेंगे। बता दें कि पिछले दिनों उन्होंने इसके लिए कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया था।

ये है प्लान

एक अंग्रेजी दैनिक के मुताबिक, कांग्रस कार्यकर्ता अब ब्लॉक, न्याय पंचायत, ग्राम सभा और बूथ लेवल पर कार्यकर्ता आम जनता के मुद्दे उठाएंगे। इसके लिए कार्यकर्ताओं की टीम को कोई हिस्सों में बांटा जाएगा। पार्टी के यूथ, दलित, पिछड़ा व अल्पसंख्यक वर्ग यूनिट से भी प्लान साझा किया गया है जिसमें कहा गया है कि बीजेपी-आरएसएस को टक्कर देने के लिए गली-गली में कार्यकर्ता का पहुंचना बेहद जरूरी है। इसके अलावा हर गांव पार्टी की ओर से चौपाल भी लगाई जाएगी।


दिनेश सिंह के जॉइन करने से लगा झटका

कुछ दिन पहले कांग्रेस से नाराज चल रहे एमएलसी दिनेश सिंह परिवार सहित बीजेपी में शामिल हो गए थे। उन्होंने 2019 चुनाव के लिए गांधी परिवार को चुनौती भी डे डाली थी। ऐसे में कांग्रेस खेमें में चिंता बढ़नी शुरू हो गई थी। इसी कारण प्रियंका गांधी को गढ़ बचाने के लिए एक्टिव होना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ समय में प्रियंका ने रायबरेली के कई कांग्रेसियों को दिल्ली बुलाकर लंबी बातचीत की है। उनसे न सिर्फ पार्टी के कामकाज की जानकारी ली, बल्कि भविष्य के लिए सुझाव भी मांगे।

संगठन की हर गतिविधि पर नजर

सूत्रों का कहना है कि 71 वर्षीय सोनिया गांधी की सेहत को देखते हुए प्रियंका को रायबरेली में सक्रियता बढ़ाने के लिए कहा गया है। स्थानीय नेताओं से कहा गया है कि अगर कोई दूसरे दल का वजनदार नेता कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जताए तो उसे प्रियंका से मिलवाया जाए। हाल ही में शिक्षकों की राजनीति कर रहे एक नेता के कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जताने पर उन्हें प्रियंका से मिलवाने के लिए कहा भी गया है। कांग्रेस हाईकमान का यह दूसरा महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है, क्योंकि कुछ महीने पहले ही सोनिया ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी राहुल गांधी को सौंपी थी।

Published on:
11 May 2018 06:21 pm
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