रायगढ़

एसी में शार्ट-सर्किट से लगी भीषण आग, जैसे तैसे 17 अनाथ मासूमों की बची जान

आकाशीय बिजली पहले संस्था के एसी को किया प्रभावित, फिर फैल गई आग

2 min read
Apr 30, 2018
आकाशीय बिजली पहले संस्था के एसी को किया प्रभावित, फिर फैल गई आग

रायगढ़. शहर के पंडरीपानी स्थित अनाथ बच्चों की संस्था मातृ निलयम के एसी में हुए शार्ट सर्किट से संस्था में आग लग गई। जिसकी वजह से संस्था के कर्मचारियों के बीच मासूम को बचाने को लेकर अफरा-तफरी मच गई। जैसे-तैसे मासूमों को लोहे के दूसरे बंद गेट को सब्बल से तोड़ कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। जिसके बाद उन्हें पास के एक अन्य संस्था में रखा गया।

जहां मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सक द्वारा मासूम बच्चों को इलाज भी किया गया। इस घटना में संस्था का कार्यालय में रखे फर्नीचर के साथ अधिकांश दस्तावेज जल कर पूरी तरह से खाक हो गया है। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद दमकल, बालू व फायर मशीन की मदद से आग पर काबू पाने की पहल की गई।

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रविवार की देर रात तेज आंधी, पानी व आकाशीय बिजली के बीच 17 मासूम बच्चों का जिंदगी खतरे में पड़ गई थी। मिली जानकारी के अनुसार रात करीब 9.45 में आकाशीय बिजली चमका। जो पंडरीपानी स्थित अनाथ बच्चों की संस्था मातृ निलयम के एसी के क्वायल को प्रभावित किया। कुछ देर बाद ही एसी के अंदल लगे पाट्र्स, जलकर नीचे गिरने लगे। जिसकी वजह से संस्था का आफिस धंू- धंू कर जलने लगा।

आफिस के गेट से जब धुंआ बाहर बरामदे में रखे बच्चों तक पहुंचा तो केयर टेकर सरस्वती, अनिता दास व सुनीता के पैरों तले जमीन खिसक गई। उनके यह समझते देर ना लगी कि संस्था के बंद आफिस में आग लग गई है। जिसका धुंआ तेजी से बाहर आ रहा है। उन्होंने बगैर देरी किए पहले माले पर मौजूद आशियाना में पदस्थ स्टॉफ को चिल्लाते हुए बुलाया। उसके बाद मातृ निलयम के 0-6 वर्ष के मासूम बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश की गई।

पर मुख्य दरवाजा पर आग लगने की वजह से उन्हें निकालने में परेशानी हो रही थी। जिसके बाद संस्था के दूसरे व तीसरे लोहे का गेट, जिसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से लकड़ी व जाली लगा कर पैक किया गया था। उसे सब्बल के माध्यम से तोड़ा गया। जिसके सहारे जैसे-तैसे मासूमों को बाहर निकाला गया।


देर रात हुआ इलाज, सभी मासूम सुरक्षित
देर रात की इस घटना में बच्चों को आग की लपटों के साथ धुंआ से तबीयत खराब होने की आशंका भी थी। जिजसे देखते हुए मामले की जानकारी मेडिकल कॉलेज के शिशु चिकित्सक विनोद नायक को दी गई। जो बगैर देरी किए संस्था पहुंंच कर जैसे तैसे बाहर निकाले गए 17 बच्चों को बरामदे में ही बैठ कर इलाज किया।

वहीं सभी बच्चों को सुरक्षित बताया। जिसके बाद घटना स्थल पर मौजूद महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी टिकवेंद्र जाटवर, बाल सरंक्षण अधिकारी दीपक डनसेना, बाल कल्याण समिति की सदस्य सुभद्रा तामस्कर, संस्था प्रमुख एसएस मोहंती ने राहत की सांस ली।

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Published on:
30 Apr 2018 04:43 pm
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