कब्रिस्तान में आज पर्यंत मुलभूत सुविधा नहीं दी जा सकी
रायगढ़. अंग्रेजों के जमाने से क्रिश्चन समुदाय के लिए बने कब्रिस्तान में आज पर्यंत मुलभूत सुविधा नहीं दी जा सकी है। चमड़ा गोदाम के पास बने इस कब्रिस्तान में पहला कब्र अंग्रेज का बना। इसके बाद भी यहां न तो अंग्रेजों ने ध्यान दिया न ही अब सरकार ध्यान दे रही है।
आश्चर्य की बात तो यह है कि यहां मुलभूत सुविधा के लिए नगर निगम से 10 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के साल भर बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है। जिसके कारण उक्त वर्ग के लोगों को परेशान होना पड़ता है।
बताया जाता है कि वर्ष 1946-47 में हावड़ा से मुंबई के बीच तूफान एक्सप्रेस के नाम से ट्रेन चलती थी जिसमें एक अंग्रेज हावड़ा जा रहा था। ट्रेन में अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई और उसकी मौत हो गई। मौत के बाद उक्त अंग्रेज की बॉडी को रायगढ़ में उतारा गया और फिर चमड़ा गोदाम के पास उसे दफनाया गया।
इसके बाद वर्ष 1972-73 से उक्त जगह में क्रिश्चन वर्ग के लोगों कब्रिस्तान के रूप में उपयोग करना शुरू किया और वर्ष 1980-81 में उक्त कब्रिस्तान की जमीन यूनाईटेड चर्चा ऑफ इंडिया, विश्वासगढ़ चर्च रायगढ़ को नजूल विभाग से आबंटित किया गया । उक्त कब्रिस्तान में मुलभूत सुविधा के लिए लगातार संबंधित वर्ग के लोग प्रयास करते रहे लेकिन आज पर्यंत तक इसका लाभ नहीं मिला। आश्चर्य की बात तो यह है कि काफी मशक्कत के बाद नगर निगम में इस कब्रिस्तान में मुलभूत सुविधा के नाम पर 15 नवंबर 2016 को 10.21 लाख रुपए का प्रशासकीय स्वीकृति स्टीमेटम के आधार पर किया गया। लेकिन उक्त स्वीकृति के बाद आज पर्यंत कार्य नहीं शुरू नहीं हो पाया।
युवा कमेटी ने की मांग
पिछले लंबे समय से मांगे पूरी न होने को लेकर विश्वासगढ़ चर्चा के युवा कमेटी अभिषेक, मयंक गुप्ता, विवेक, स्वपनीय लाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर मुलभूत सुविधा दिलाने की मांग की है।
ये है समस्या
इस कब्रिस्तान में न तो पानी की पर्याप्त यवस्था है न ही प्र्रेयर करने के लिए पर्याप्त बेंच की व्यवस्था है न तो यहां टॉयलेट की सुविधा है। इसके अलावा ओर भी कई प्रकार की समस्या यहां व्याप्त है जिसे दूर करने के लिए समय-समय पर मांगे उठती रही है। बताया जाता है कि राजनीतिक पार्टियों ने भी कई बार मांग किया है लेकिन यह पूरा नहीं हो पाया।