- संघ की जिला अध्यक्ष ने महिला बाल विकास विभाग के सचिव को पत्र लिख कर पूछा सवाल
रायगढ़. जिले में 3409 आंगनबाड़ी केंद्रों में अभी भी करीब 1400 से अधिक ऐसे केंद्र है। जहां पर सहायिका, लकड़ी झोंक-झोंक कर बच्चों को नए मेन्यू के अनुसार खाना परोस रही हैं। जो केंद्र की सहायिका के साथ कार्यकर्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इसी परेशानी को देखते हुए संघ की जिला अध्यक्ष ने आंगनबाड़ी केंद्र के नए मेन्यू का नाम 'छप्पन-भोग' रखा है।
संघ की मानें तो शासन को बगैर रसोई गैस सिलेंडर के 60 पैसे प्रति बालक/बालिका की दर से आंगनबाड़ी केंद्रों में छप्पन भोग का व्यंजन चाहिए। ऐसा नहीं होने पर निरीक्षण द्वारा कार्रवाई भी की जाती है। जिसे देखते हुए विभागीय सचिव से पत्राचार कर पूरे मामले से अवगत कराया गया है। वहीं इस दिशा में जल्द से जल्द पहल करने की मांग की है।
प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्र में एक जुलाई से नए मेन्यू के आधार पर खाना परोस जा रहा है। जिसके पीछे बालक/बालिकाओं को पौष्टिक युक्त भोजन देने की बात कहकर शासन ने खूब वाहवाही लूटी जा रही है पर इसके पीछे की एक और हकीकत सामने आ रही है। जिले की करीब 1400 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र की सहायिका के साथ कार्यकर्ता भी इस कथित 56 भोग के कारण परेशान हो रही हैं।
मिली जानकारी के अनुसार शासन से बढ़े हुए मेन्यू के बाद प्रति बच्चे, 60 पैसे का ईंधन मिलता है। अगर केंद्र में 10 बच्चे हुए तो 6 रुपए...। इस ६ रुपए के ईंधन (लकड़ी या फिर रसोई गैस) में केंद्र की सहायिका को नए मेन्यू के अनुसार गर्म भोजन परोसने की जिम्मेदारी दी गई है। जिस केंद्र में रसोई गैस सिलेंडर है। वहां काम चल जा रहा है, पर जहां वर्षो से चूल्हें मेंं लकड़ी को झोंक झोंक कर खाना बनाने की परंपरा है। उन केंद्रों में शासन का यह नया मेन्यू परेशानी का सबब बन गया है।
ऐसे में १४ से अधिक कार्यकर्ता व सहायिका की इस परेशानी को देख कर संघ की जिला अध्यक्ष ने महिला बाल विकास विभाग के सचिव को एक पत्र लिख कर सवाल पूछा है कि आखिर बढ़े हुए दर यानी ६० पैसे के ईंधन पर गर्म भोजना कैसे परोसा जाए। संघ ने इस परेशानी को बयां करते हुए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में जल्द से जल्द रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की मांग की है। जिससे शासन की आंगनबाड़ी से जुड़ी सुविधाओं को बच्चों तक पहुंचाने में कार्यकर्ता व सहायिका को मदद मिल सके।
शहर में होती है अधिक परेशानी
संघ की अध्यक्ष की माने तो मेन्यू के अनुसार खाना परोसने की बाध्यता के बीच ग्रामीण क्षेत्र में कभी-कभी उतार चढ़ाव हो जाता है। पर शहरी क्षेत्र में शत प्रतिशत रिजल्ट की अपेक्षा की जाती है। अगर रायगढ़ ब्लॉक की बात करे तो १५७ केंद्रों में से महज १६ केंद्रों में ही रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया गया है। शेष में अभी भी लकड़ी धुंआ के बीच सहायिका छप्पन भोग बनाते हुए नजर आती है। जो किसी चुनौती से कम नहीं, पर इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
नहीं सुनी फरियाद तो करेंगे आंदोलन
आंगनबाड़ी केंद्रों में ६० पैसे के ईंधन के बीच छप्पन भोग बनाने का प्रस्ताव को लेकर विभागीय सचिव से पत्राचार किया गया है। जिससे उनका ध्यान इस गंभीर विषय व हर दिन की चुनौती की ओर आकर्षित किया जा सके। अगर शासन स्तर पर इस मामले में कोई पहल नहीं हुई तो सहायिका, सामूहिक रुप से विरोध करेंगी। जिसका संघ द्वारा समर्थन किया जाएगा। हालांकि इसकी रुपरेखा फिल्हाल तय नहीं की गई है। संघ की माने तो यह भविष्य की बातें हैं।
750 रुपए में चाहिए किराया का मकान
आंंगनबाड़ी केंद्र में रसोई गैस के अभाव व 60 पैसे के ईंधन में छप्पनभोग तैयार करने के साथ ही किराए के मकान का भी उल्लेख किया गया है। संघ की माने तो शासन को 750 रुपए के आंगनबाड़ी केंद्र को संचालित करने के लिए भवन चाहिए। उक्त भवन के साथ उसका खसरा व नक्शा भी चाहिए। जो शहरी क्षेत्र के कतई संभव नहीं है। ऐसे में, बगैर किसी शर्त के शहरी क्षेत्रों में किराए के मकान लेने की राशि में वृद्धि की मांग भी की गई है।
-आंगनबाड़ी केंद्रों में शासन का नए भेजन मेन्यू, किसी छप्पन भोग से कम नहीं है। पौष्टिक की बात कह कई प्रकार के व्यजंन देने का उल्लेख कर दिया। पर ईंधन के नाम पर ६० पैसें ही मिल रहे हैं। इसमें गर्म भोजन सहायिका कैसे दे सकती है। इन सभ्ज्ञी परेशानियों को देखते हुए विभागीय सचिव का पत्राचार किया गया है। वहीं केंद्रों में रसोई गैस सिलेंडर की मांग की गई है- अनिता नायक, अध्यक्ष, छ.ग आंबा कार्य. सहा. संघ, रायगढ़