रायगढ़

इस बात को लेकर पार्षदों में देखा जा रहा भय, दौड़े-भागे पहुंच रहे हैं नगर निगम

- नगर निगम के द्वारा शहर में विकास कार्य के लिए टेंडर किया गया था। इसमें करीब दो सौ से अधिक निर्माण कार्य थे।

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Sep 30, 2018
इस बात को लेकर पार्षदों में देखा जा रहा भय, दौड़े-भागे पहुंच रहे हैं नगर निगम

रायगढ़. विधानसभा चुनाव की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इसका भय नगर निगम के पार्षदों में देखने को मिल रहा है। गाहे-बगाहे नगर निगम पहुंचने वाले पार्षद मौजूदा समय में लगातार निगम पहुंच रहे हैं। वहीं वे इन कार्यों को निरस्त कराने में जुटे हैं जिन कार्यों का उनके वार्ड टेंडर तो हो चुका है, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। वहीं निरस्त के बाद इसका नया टेंडर लगाया जाना है। ताकि आचार संहिता लगाने के बाद भी उनके वार्ड में विकास कार्य हो सके।

नगर निगम के द्वारा शहर में विकास कार्य के लिए टेंडर किया गया था। इसमें करीब दो सौ से अधिक निर्माण कार्य थे। नगर निगम में कार्यों को करने वाले ठेकेदारों ने निर्माण कार्य का टेंडर ले लिया, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। निर्माण शुरू नहीं होने की दशा में नगर निगम आयुक्त ने लोककर्म विभाग की समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में यह आदेश जारी किया गया कि जो कार्य शुरू नहीं हो रहे हैं। ऐसे कार्यों को निरस्त किया जाए। हालांकि नगर निगम आयुक्त ने इसका आदेश जारी कर दिया, लेकिन अधिकारी इस आदेश के बाद भी लेटलतीफी करते रहे।

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मौजूदा समय में करीब दो दर्जन निर्माण कार्यों का ही टेंडर निरस्त किया जा सका है। शेष कार्य अभी भी निरस्ती की कगार पर लटके हुए हैं। अब जब विधान सभा चुनाव का आचार संहिता लगने को है, तब पार्षद भी हड़बड़ाए हुए हैं। वहीं वे लगातार नगर निगम पहुंच रहे हैं। इसके पीछे कारण यह है कि उनके वार्ड में जो कार्य स्वीकृत हुआ था वह अब तक शुरू नहीं हो सका। वहीं नगर निगम के द्वारा उक्त कार्यों को अब तब निरस्त भी नहीं किया जा सका है।

खास बात यह है कि जब तक कार्य निरस्त नहीं होगा तब तक उस कार्य की नई निविदा नहीं निकाली जा सकती। ऐसे में पार्षद अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं और वार्ड में स्वीकृत कार्यों को निरस्त करने की बात कह रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द नया टेंडर लगाया जा सके।

पुराने के साथ किया जा रहा नया टेंडर
नगर निगम के अधिकारी भी यह माने रहे हैं कि आचार संहिता लगने के बाद नए कार्य नहीं हो सकेंगे। ऐसे में टेंडर की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाई जा रही है। ताकि आगे किसी प्रकार से परेशानी नहीं हो।

30 करोड़ की मिली थी स्वीकृति
शहर में विकास कार्य कराने के लिए दो किश्तों शासन से ३० करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली थी। पहले किश्त में १० करोड़ की राशि स्वीकृत की गई। इस १० करोड़ की राशि के भी कई कार्य अब तक लंबित हैं। वहीं इसके बाद २० करोड़ की राशि स्वीकृत की गई। इस राशि से भी शहर के विभिन्न जगहों पर डामरीकरण व कांक्रीटीकरण सड़क क ेलिए टेंडर कराया गया, लेकिन अब तक इस राशि के स्वीकृत अधिकांश कार्य लटके हुए हैं।

आचार संहिता लगते ही लटक जाएंगे कार्य
खास बात यह है कि विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद जो कार्य आचार संहिता के पहले स्वीकृत हुए होंगे वहीं कार्य किए जा सकेंगे। नया विकास कार्य के लिए किसी प्रकार से टेंडर नहीं किया जा सकेगा। ऐसे में पार्षदों की मंशा यह है कि आचार संहिता लगने से पहले ही उनके वार्डों में विकास कार्यों के टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो जाए, ताकि आचार संहिता लगने के बाद भी विकास कार्य किसी प्रकार से प्रभावित नहीं हो।

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Published on:
30 Sept 2018 12:14 pm
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