- चिकित्सा जांच के बाद बच्ची को मातृ निलियम संस्था में किया गया शिफ्ट
रायगढ़. बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जिला रायगढ़ में एक बार फिर बेटी को अपनाने से इनकार करने का मामला सामने आया है। हालांकि महिला बाल विकास विभाग द्वारा सखी वन स्टॉप सेंटर के बाहर रखे गए झूले में बच्ची को उसके परिजन छोड़ कर चले गए।
बच्ची के रोने की आवाज सुनकर संस्था के अधिकारी व कर्मचारी बाहर निकले। उसके बाद इस मामले से आला अधिकारी को अवगत कराते हुए बच्ची को अस्पताल ले जाया गया। जहां मेडिकल जांच के बाद करीब एक माह की बच्ची को मातृ निलियम संस्था में रखा गया है।
शहर के किलो विहार कॉलोनी स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर के बाहर शुक्रवार की देर रात करीब 10 बजे एक बच्चे की रोने की आवाज मिली। सखी वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक अधिकारी अर्चना लाल व उनके सहयोगी जब गेट खोल कर बाहर देखा तो महिला बाल विकास विभाग द्वारा लगाए गए झूले में करीब एक बच्ची रो रही थी।
सखी वन स्टॉप सेंटर द्वारा उक्त बच्चे को झूले से उठाकर संस्था में लाया गया। उसके बाद मामले की जानकारी महिला बाल विकास अधिकारीए पुलिस व मातृ निलियम संस्था को दी गई। जहां नवजात बच्चे को रखने की व्यवस्था है। सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारी व संस्था के लोग सखी सेंटर पहुंचे। जहां बच्चे को अपने कब्जे में लेने के साथ ही उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए।
डॉक्टरों द्वारा बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ बताए जाने के बाद उसे मातृ निलियम संस्था में ले जाया गया। जहां संस्था की केयर टेकर द्वारा बच्चे की विशेष देखभाल की जा रही है। संस्था के लोगों की मानें तो बच्ची को पूरी तैयारी के साथ झूलेलाल को छोड़ा गया था। बच्ची के शरीर पर एक गर्म कपड़ा के साथ कुछ अन्य कपड़े भी थे।
इस साल का दूसरा मामला
ऐसे बच्चों को जीवन दान देने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर झूला लगवाने की पहल जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ नीलेश क्षीरसागर ने की थी । हाल के दिनों में महिला बाल विकास अधिकारी टिकवेंद्र जाटवर ने सखी वन स्टॉप सेंटर के बाहर भी एक झूला रखवाया था। जिसका नतीजा यह हुआ कि वर्ष 2018 में ऐसे दो प्रकरण सामने आए। जिसमें परिजनों द्वारा अपनाने से इनकार की गई दो बेटियों को रात के अंधेरे में झूले में रख कर परिजन भाग चुके है।