- चेकिंग को होते हुए 48 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस को न तो कोई संदेही दिखा और न ही कोई संदेहास्पद चीज जब्त हुई है।
रायगढ़. ओडिशा यानि की गांजा का गढ़... यहां गांजा इतना सस्ता मिलता है कि लोग यहां से गांजा तस्करी कर रातों रात अमीर बनने की लालच में अपराध का रास्ता अपनाते हैं। पिछले एक साल का रिकार्ड देखा जाए तो रायगढ़ जिले की पुलिस ने गांजा तस्करी को लेकर गिनीचुनी कार्रवाई करके ही अपनी पीठ थपथपाती रही है, लेकिन जैसे ही आचार संहिता लागू हुई जिला प्रशासन की टीम ने पुलिस के साथ मिलकर ओडिशा बार्डर से निकलने वाले रास्तों में सघन चेकिंग शुरू कर दी है। हालत यह है कि इस चेकिंग को होते हुए 48 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस को न तो कोई संदेही दिखा और न ही कोई संदेहास्पद चीज जब्त हुई है।
ओडिशा राज्य रायगढ़ जिले से लगा हुआ राज्य है। रायगढ़ जिला व ओडिशा राज्य की सीमावर्ती क्षेत्रों की बात करें तो ओडिशा का बरगढ़ क्षेत्र रायगढ़ के सरिया को टच करता है। इसके साथ ही रायगढ़ जिले में प्रवेश करने वाले रास्तों की बात करें तो सरिया, बरमकेला, पुसौर, लैलुंगा आदि ब्लाक से होते हुए कई रास्ते ओडिशा और रायगढ़ को जोड़ते हैं। अतरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर के मुताबिक आचार संहिता के बाद से जिला प्रशासन और पुलिस की टीम मिलकर लैलुंगा, चक्रधरनगर, तमनार, डोंगरीपाली, पुसौर, सरिया और सारंगगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत चेकिंग प्वाइंट लगाए गए हैं।
इन चेक पोस्टों में एसडीएम, तहसीलदारों की भी ड्यूटी लगाई गई है, जो कि संबंधित थाने के टीआई व उनकी टीम के साथ चेकिंग कर रहे हैं। इनके द्वारा हर आने-जाने वाले वाहन चाहे वह वीआईपी या फिर अन्य सभी की गहन चेकिंग की जा रही है। हालांकि अभी तक जांच टीम के हाथ कोई सफलता नहीं आई है।
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पड़ोसी जिले में अधिक पकड़ा जाता है गांजा
इसे रायगढ़ पुलिस की ढील कहें या फिर लापरवाही, लेकिन सच यह है कि जितना गांजा जांजगीर जिले के चंद्रपुर, डभरा और अन्य थाना सहित बिलासपुर क्षेत्र में पकड़ा जाता है उतना रायगढ़ जिले में नहीं पकड़ा गया है। यहां की पुलिस की मानें तो उन्होंने सरिया और सारंगगढ़ सहित अन्य थानों में बड़ी कार्रवाई की है, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई उन्हें याद नहीं है।
इन चीजों की भी होती है तस्करी
ओडिशा राज्य से तस्करी वाली चीजों की बात करें तो यहां से गांजा तो बड़े पैमाने आता ही है, साथ ही ईमारती लकड़ी और कच्ची शराब की भी तस्करी की जाती है। इस अवैध कारोबार में जुड़े लोग खुलेआम इन जीचों की तस्करी करते हैं, लेकिन यह पुलिस को क्यों नहीं दिखती यह समझ से परे है। ईमारती लकड़ी की तस्करी तो ट्रेन से भी की जाती है, लेकिन आरपीएफ और जीआरपी चंद रुपए के लालच में अपनी आंखे मूंद लेती है और तस्कर इस लकड़ी को रेलवे स्टेशन से थोड़ा पहले गिरा देते हैं और वहां खड़ा उनका आदमी उसे लेकर बाजार पहुंचा देता है।
इन रास्तों से होती है तस्करी
गांजा व अन्य मादक पदार्थों की तस्करी की बात करें तो ओडिशा से रायगढ़ जिले के लिए भुक्ता, रुचिता होते हुए सरिया तक पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा भुक्ता से कोड़तल्ला होते हुए और सोहिला से डोंगरीपाली होते हुए तस्कर आसानी से छत्तीसगढ़ राज्य के रायगढ़ जिले में प्रवेश कर जाते हैं। इसके बाद यह मादक पदार्थ अलग-अलग जिलों के लिए भेज दिया जाता है।
सीधी बात. हरीश राठौर, एडिशनल एसपी रायगढ़
प्र. अभी सघन चेकिंग का क्या तात्पर्य है?
उ. आचार संहिता के चलते जिला प्रशासन की टीम के साथ चेकिंग लगाई गई है।
प्र. अभी तक कुछ सफलता मिली है क्या?
उ. नहीं अभी तक कोई भी संदेही या संदिग्ध चीज नहीं पाई गई है।
प्र. ओडिशा गांजा व शराब तस्करी का मुख्य केंद्र है?
उ. हां हमने उन सभी रास्तों पर चेकिंग लगाई है, जहां से तस्करी की आशंका थी।
प्र. रायगढ़ पुलिस इसे लेकर दूसरे जिलों की अपेक्षा काफी कम कार्रवाई करती है क्या कारण है?
उ. ऐसी बात नहीं है सरिया और सारंगगढ़ पुलिस ने कई कार्रवाई की है।
प्र. इस साल जनवरी से लेकर अब तक कितनी कार्रवाई हुई है?
उ. मुझे मौखिक याद नहीं है, देखकर ही बताया जा सकता है।