
रायगढ़. बेलादुला मरीन ड्राइव की हालत इतनी जर्जर है कि उस मार्ग से गुजरना लोगों के लिए चुनौती बन गया है। बेलादुला खर्राघाट के शुरुआत से लेकर चक्रपथ तक इस मार्ग में इतने बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं कि थोड़ी सी लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना को अंजाम दे सकती है। इस मार्ग पर पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन व नगर निगम के अधिकारियों के रोजाना आना-जाना लगा रहता है। इसके बाद भी कोई इस मार्ग की सुध नहीं ले रहा।
यहां तक कि शहर में इतनी संस्थाएं हैं, युवा नेताओं की टोली है, लेकिन कोई इस मार्ग के जीर्णोंद्धार को लेकर सामने नहीं आ रहा है। इस मार्ग पर पहली भी छोटी-बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन शायद सभी को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार है। इसी मार्ग पर स्कूली बच्चों का भी आना-जाना रहता है। क्योंकि उनकी मजबूरी है। वर्तमान में भले ही कोई इस मार्ग के सुधार में रुचि नहीं ले रहा हो, लेकिन अगर कोई दुर्घटना घटित होती है तो अपना राजनीतिक रोटी सेकने व चक्काजाम करने जरूर आ जाऐंगे।
बारिश में कीचड़, बाकी समय धूल
जब बारिश होती है मरीन ड्राइव में बने गड्ढों में बारिश का पानी भर जाता है। इस वजह से उस मार्ग पर आवागमन करने वाले लोगों को गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं होता। ऐसे में कई बार दुर्घटना भी हो जाती है। लोग चोट खाकर अपने घर चले जाते हैं, वे अपनी पीड़ा किसे बताए। वहीं सामान्य दिनों में इस मार्ग में इतने धूल उड़ते हैं कि सामने देखना व सांस लेना मुश्किल हो जाता है। दोपहर के समय में जब स्कूली बच्चों से भरा बस व अन्य चारपहिया वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं तो पूरा मरीन ड्राइव धूल से ढंक जाता है।
भारी वाहन ने सड़क को किया बर्बाद
शहर में भारी वाहन निषेध होने के बाद भी बेलादुला मरीन ड्राइव से भारी वाहनों का आवागमन जारी है। रात्रि दस बजने के बाद इस मार्ग पर वाहनों की लाइन लगी रहती है। इन्हीं भारी वाहनों की वजह से इस मार्ग की हालत खस्ता हो गई है। जबकि ये भारी वाहन चक्रपथ होते हुए चक्रधर नगर थाना और कलेक्टोरेट होते हुए डिग्री कॉलेज तथा पहाड़ मंदिर की ओर से कंपनियों में जाते हैं। इस पर न तो पुलिस कार्रवाई करती है और न ही यातायात विभाग के कोई जवान नजर आते हैं। ऐसा नहीं है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं, इसके बाद भी वे मूकदर्शन बने रहते हैं।