- सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाली महिलाओं को
रायगढ़. विधानसभा चुनाव की तिथि नजदीक आते ही यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। जिला प्रशासन द्वारा चुनाव कार्य का हवाला देते हुए लगातार निजी बसों का अधिग्रहण किया जा रहा है। अब तक करीब दो सौ बसों का अधिग्रहण किया जा चुका है। इधर बसों के अधिग्रहण होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। स्थिति यह हो गई है कि बड़ी मुश्किल से बस चल रही है और उसमें भी यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया जा रहा है। ऐसे में कुछ यात्री से मौजूदा समय में बसों से यात्रा करने पर भी तौबा करने लगे हैं।
मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आते जा रही है यात्रियों की परेशानी वैसे-वैसे बढऩे लगी है। मौजूदा समय में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने करीब २०० बसों को अधिग्रहण कर लिया है। अभी भी अधिग्रहण का काम नहीं रूका है। इसमें सबसे अधिक बसें जशपुर, अबिंकापुर व झारखंड जाने वाली प्रभावित हुई हैं। बसों के अधिग्रहण के बाद स्थिति यह बन गई है कि रायगढ़ से जशपुर व झारंखड तक प्रत्येक आधा घंटा के भीतर बसों का परिचालन होता था, लेकिन अब यह स्थिति है कि दो से तीन में एक बस को स्टैंड से छोड़ा जा रहा है। यह स्थिति निजी बसों में तो हैं ही, वहीं जिला प्रशासन के द्वारा यात्रियों को सुविधा देने के लिए शुरू की गई सिटी बसों के परिचालन में भी यही स्थिति बनी हुई है। शहर में २० सिटी बसों का परिचालन किया जाना है, लेकिन मौजूदा समय में आधे से अधिक बसों का अधिग्रहण कर लिया गया है। इससे जो सिटी बस रायगढ़ से घरघोड़ा, तमनार व पुसौर, सरिया क्षेत्र में दो से तीन फेरा लगाती थी, अब एक से दो फेरा में ही सिमट गई है।
यात्री हो रहे परेशान
बसों की इस स्थिति को लेकर आम आदमी से लेकर खास तक परेशान है। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाली महिलाओं को हैं। पहले स्थिति यह थी कि लंबी दूरी तक चलने वाले यात्रियों व महिलाओं को सीट दी जाती थी, लेकिन अब यह स्थिति नहीं है। अब यह हालात हैं कि बड़ी मुश्किल से यात्री को बस में चढ़ाया जा रहा है।
घरघोड़ा और तमनार तक चल रहे आटो
बसें अधिग्रहित होने के बाद छोटे वाहन की डिमांड ज्यादा बढ़ गई है। मौजूदा समय में जीप, कार व अन्य वाहन बसों का काम करते हुए सवारी ढो रही हैं। इसके अलावा आटो का परिचालन भी लंबी दूरी तक होने लगा है। पहले मुश्किल से आटो लाखा व गेरवानी तक जाते थे, लेकिन अब स्थिति यह है कि आटो घरघोड़ा व तमनार डेली रूटिन की तरह चल रही है। यही स्थिति सारंगढ़ की ओर भी है।
अभी और बढ़ेगी परेशानी
बस आपरेटरों की मानें तो मौजूदा समय में बसों का अधिग्रहण तो किया गया है। हालांकि अभी अधिकांश रूटों पर कम बसों का आवागमन हो रहा है। वहीं यह संभावना भी जताई जा रही है कि एक सप्ताह बाद यह परेशानी और बढ़ सकती है। कई बार स्थिति यह बनती है कि यात्रियों से भरे बस को बीच सड़क पर रोकते हुए खाली करवा दिया जाता है।