रायगढ़

तब टूटा था नमक कानून, अब बापू के जन्मदिन पर यहां के ग्रामीणों ने चुना गांधीगिरी का रास्ता और तोड़ा कोयला कानून

इस प्रदर्शन के सहारे ग्रामीण सरकार के खिलाफ अपनी असहमति जता रहे

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Oct 03, 2018
इस प्रदर्शन के सहारे ग्रामीण सरकार के खिलाफ अपनी असहमति जता रहे

रायगढ़. दो अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर जिले के तमनार ब्लाक के गारे गांव में सातवीं बार कोयला कानून को तोड़कर कोयला सत्याग्रह किया गया। इस प्रदर्शन के सहारे ग्रामीण सरकार के खिलाफ अपनी असहमति जता रहे थे। उनका कहना था कि हमें खदान नहीं चाहिए यदि विकास के लिए खदान आवश्यक है तो इस पर खनन का पहला अधिकार हमारा हो।


इसके साथ ही ग्रामीणों की ओर से हमारी जमीन हमारा कोयला के नारे को भी बुलंद किया गया। इस प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों का कहना था कि जिस प्रकार गांधी जी ने नमक सत्याग्रह करके नमक कानून को तोड़ा था और इसे बनाने का हक भारतीयों को दिलवाया था उसी तर्ज पर कोयला सत्याग्रह किया जा रहा है।

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विदित हो कि दो अक्टूबर साल 2012 से गारे सहित अन्य गांव के ग्रामीणों ने कोयला सत्याग्रह की शुरुआत की है। इसके सहारे ग्रामीण सरकार से इस बात की मांग कर रहे हैं कि उनकी जमीन के नीचे के कोयले पर उनका हक दिया जाए ताकि ग्रामीण भी विकास के इस दौड़ में अपनी भागीदारी निभा सकें और अपने जल, जंगल व जमीन को सहेजते हुए खनिजों का दोहन कर सकें।

हलांकि यह भी दुर्भाग्यजनक है कि ग्रामीणों के इस आंदोलन और मांग को लेकर न तो सरकार ने अब तक कोई प्रयास किया है और न ही कोई जनप्रतिनिधि खुलकर इनके साथ आया है। इसके बाद भी ग्रामीण अपने स्तर पर इस मांग को लगातार उठा रहे हैं।
कोयला सत्याग्रह के दौरान जुटी ग्रामीणों की बड़ी संख्या में यह बताया गया कि तमनार ब्लाक ऐसा ब्लॉक है जहां प्राकृतिक संसाधनों का अकूत भंडार है। जिसमें कोयला प्रमुख है और इस कोयले की वजह से यहां के मूल निवासियों का अपने संसाधनों से वंचित होना पड़ रहा है।


ग्रामीणों ने बताया कि निजी कंपनियों को और सरकार को इस कोयला से फायदा मिलता है लेकिन स्थानीय निवासियों को तो सिर्फ इसका दुष्परिणाम ही भुगतना पड़ता है। ग्रामीण कोल ब्लॉक कंपनियों की मनमानी की वजह से ना सिर्फ अपने अधिकारों से वंचित हैं बल्कि शासन की दोहरी नीति का भी शिकार बन जाते है।


ये रहे उपस्थित
सातवीं बार के इस कोयला सत्याग्रह में डॉ हरिहर पटेल, इंदु नेताम कांकेर, राम गुलाब सिंह राजिम गरियाबंद, राजेश त्रिपाठी तथा सविता रथ जनचेतना मंच, हेमलता राजपूत अभनपुर, बंशी पटेल पेलमा, अजित राज आदिवासी युवा मंच, लक्ष्मीनारायण चौधरी तमनार, रोही दास गरियाबंद, अशोक शर्मा छाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणाों की उपस्थिति रही।


आदिवासियों के राजा का किया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान पेलमा गांव के धर्मराज राठिया जिसे आदिवासी समाज की ओर से अपना प्रमुख माना जाता है या राजा माना जाता है उनका सम्मान भी किया गया। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि हर गांव में ग्रामसभा आयोजित होगी और इसमें यह प्रस्ताव लाया जाएगा कि हमें खनन नहीं चाहिए, यदि करना है तो इसका पहला अधिकार हमारा हो।


भेजेंगे पोस्टकार्ड
कोयला सत्याग्रह के आरंभ से पहले ग्रामीणों ने एक बैठक आयोजित की और इस बैठक में इस बात का निर्णय लिया गया कि प्रभावित हर गांव से पोस्टकार्ड अभियान चलाया जाएगा और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को भेजा जाएगा, जहां इस बात की मांग की जाएगी कि हमें खनन नहीं चाहिए, यदि करना ही है तो हमें इसका अधिकार दिया जाए।

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Published on:
03 Oct 2018 01:40 pm
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