रायगढ़

महास्नान के बाद बीमार हुए भगवान जगन्नाथ, अब आषाढ़ के द्वितीया को खोलेंगे आंख

- गुरुवार को हुए इस धार्मिक आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालु जगन्नाथ मंदिर में उपस्थित हुए

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Jun 29, 2018
महास्नान के बाद बीमार हुए भगवान जगन्नाथ, अब आषाढ़ के द्वितीया को जागेंगे भगवान

रायगढ़. रथयात्रा को लेकर लोगों में उत्साह शुरू हो गया है। इसकी शुरुआत गुरुवार से हो गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार जगन्नाथ मंदिरों में गुरुवार को भगवान को महास्नान कराया गया। इस महास्नान से भगवान बीमार हो गए। अब आषाढ़ के द्वितीया को भगवान आंख खोलेंंगे। इस दिन विधिविधान से पूजा-अर्चना के बाद रथ यात्रा निकाली जाएगी।

ओडिशा प्रांत के पूरी की जगन्नाथ यात्रा की तर्ज पर अंचल में भी जगन्नाथ यात्रा मनाया जाता है। इसकी शुरुआत काफी पहले हो गई है। वहीं शहर में सबसे पुराना जगन्नाथ मंदिर राजापारा के जगन्नाथ मंदिर को माना जाता है। बताया जाता है कि यहां भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा मनाने का प्रचलन राजशाही के समय से हुआ था। राजशाही समाप्त होने के बाद इस रथ यात्रा का प्रचलन भी काफी कम हो गया था। इसके बाद उत्कल सेवा संस्थान ने इसे फिर से शुरुआत की और उसी उत्साह में रथ यात्रा मनाए जाने का प्रचलन शुरू हुआ।
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इस यात्रा में आसपास के काफी लोग यहां आने लगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार रथ यात्रा से पूर्व जेठ पूर्णिमा को भगवान का महास्नान कराया जाता है। इसमें भगवान जगन्नाथ स्वामी बीमार पड़ जाते हैं। गुरुवार को हुए इस धार्मिक आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालु जगन्नाथ मंदिर में उपस्थित हुए थे। सुबह से ही पूजा-अर्चना की शुरुआत हो गई थी और भगवान को महास्नान कराया गया। मान्यता है कि इस स्नान से भगवान बीमार पड़ जाते हैं। इस दौरान मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हुए थे।

अषाढ़ मेंं जागेगें भगवान जगन्नाथ
बीमार पडऩे के बाद भगवान जगन्नाथ स्वामी चीर निद्रा में लीन हो जाते हैं। ऐसे में देव स्नान पूर्णिमा के बाद 15 दिनों के लिए महाप्रभु के पट को बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद आगामी 13 जुलाई को नेत्रोत्सव व 14 को रथयात्रा उत्सव का धार्मिक आयोजन होगा। हालांकि इस बीच 23 जुलाई तक यह धार्मिक आयोजन होगा।

भंडारे का किया गया आयोजन
मंदिर में देव स्नान पूजा अर्चना के बाद दोपहर में बारह बजे से देव स्नान के बा महाभंडारा का आयोजन किया गया। जिसमें शहर के सैकड़ों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया था। हर वर्ष रथयात्रा को यहां जोरशोर से मनाया जाता है।

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Updated on:
29 Jun 2018 03:04 pm
Published on:
29 Jun 2018 02:16 pm
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