रायपुर

10वीं पास मूर्तिकार का कमाल, परवेज आलम ने गढ़ी छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी कांसे की आंबेडकर प्रतिमा, 100 से ज्यादा मूर्तियों का रचा इतिहास

Raipur News: रायपुर की सड़कों पर इन दिनों एक भव्य पहचान हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है, घड़ी चौक के पास स्थापित छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी कांसे की डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रतिमा।

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Apr 19, 2026
भिलाई के परवेज आलम की कला का कमाल (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर @ताबीर हुसैन। CG News: राजधानी में घड़ी चौक के पास स्थापित राज्य की सबसे बड़ी कांसे की डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रतिमा इन दिनों चर्चा में है। इस भव्य मूर्ति को आकार देने वाले भिलाई के मूर्तिकार परवेज आलम ने सीमित पढ़ाई के बावजूद अपनी कला से बड़ी पहचान बनाई है।

बचपन के शौक से शुरू हुआ सफर आज सैकड़ों मूर्तियों तक पहुंच चुका है। परवेज बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही पेंटिंग और मूर्तिकला का शौक था। उन्होंने केवल 10वीं तक पढ़ाई की, लेकिन साल 2000 से लगातार इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

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समय पर डिलीवरी सबसे बड़ी चुनौती

अब तक वे 100 से ज्यादा मूर्तियां बना चुके हैं। उनके साथ 6 लोगों की टीम काम करती है, जबकि ढलाई के समय अतिरिक्त कारीगर बुलाए जाते हैं। वे बताते हैं कि समय पर काम पूरा करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। कई बार इसके लिए रात-रात भर काम करना पड़ता है।

कबाड़ से बनती है कला की विरासत

कांसे की मूर्तियों में कॉपर, जिंक, टिन और लेड का मिश्रण होता है, जिससे यह जंग-रहित और टिकाऊ होती हैं। परवेज पुरानी कांसे की चीजें बर्तन दुकानों से लेकर उन्हें रिसाइकिल कर नई मूर्तियों का रूप देते हैं। परवेज कहते हैं यह कला नई पीढ़ी तक पहुंचानी है।

पद्मश्री गुरु से सीखी बारीकियां

परवेज ने भिलाई के प्रसिद्ध मूर्तिकार पद्मश्री जॉन मार्टिन नेल्सन से मूर्तिकला की बारीकियां सीखीं। वहीं से क्वालिटी और तकनीक की मजबूत नींव मिली। खैरागढ़ यूनिवर्सिटी से उन्हें कास्टिंग का काम मिला, जहां हेड ऑफ डिपार्टमेंट एसपी चौधरी के मार्गदर्शन में उन्होंने ढलाई की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से सीखा। परवेज सिर्फ कांसे ही नहीं, बल्कि सीमेंट और फाइबर की मूर्तियां भी बनाते हैं। जगदलपुर में उन्होंने क्रांतिकारियों की फाइबर मूर्तियां तैयार कीं, वहीं शहीद विनोद कुमार चौबे की मूर्ति गन मेटल से बनाई।

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Updated on:
19 Apr 2026 02:38 pm
Published on:
19 Apr 2026 02:37 pm
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