रायपुर

छत्तीसगढ़ में 12% लोग वाहक, शादी से पहले ये जांच जरूरी, नहीं तो बढ़ेगा खतरनाक बीमारी का खतरा

Sickle Cell Awareness Day: प्रदेश में लगभग 12 प्रतिशत लोग सिकलसेल के वाहक पाए गए हैं, जिससे आने वाले समय में इसके फैलने का खतरा और बढ़ सकता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि शादी से पहले कुंडली मिलान की जगह सिकलसेल जांच को प्राथमिकता दी जाए।
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Updated: 18 Jun 2026, 8:06 AM IST
World Sickle Cell Awareness Day
विश्व सिकलसेल जागरुकता दिवस (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@पीलूराम साहू। World Sickle Cell Awareness Day 2026: प्रदेश में कुछ जाति विशेष के लोग सिकलसेल की गिरफ्त में हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सिकलसेल को फैलने से रोकने व जड़ से खत्म करने के लिए शादी के पहले कुंडली के बजाय सिकलसेल रिपोर्ट का मिलान जरूरी है। प्रदेश की 12 फीसदी आबादी इस बीमारी के वाहक (करियर) है, जो देश में सबसे ज्यादा है। यही नहीं मरीजों की संख्या भी सवा दो लाख है। सिकलसेल से करीब 30 लाख आबादी प्रभावित है।

18 जून को विश्व सिकलसेल जागरुकता दिवस मनाया जाएगा। इस मौके पर पत्रिका ने विशेषज्ञों से इस बीमारी के बारे में बात की। डॉक्टरों के अनुसार बीमारी के वाहक से मतलब है कि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानी नहीं होती, लेकिन शादी के दौरान वाहक-वाहक के मिलने से वाहक व सिकलसेल से संक्रमित शिशु पैदा होने की आशंका बढ़ जाती है। बीमारी जेनेटिक है और रुकने के बजाय बढ़ती जा रही है।

2018 से दिव्यांग सर्टिफिकेट भी बन रहा मरीजों का

प्रदेश में सिकलसेल मरीजों का 2018 से दिव्यांग सर्टिफिकेट भी बनने लगा है। यह सर्टिफिकेट जिला अस्पताल का मेडिकल बोर्ड बनाता है। प्रदेश के 10 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित है। इनमें रायपुर, नारायणपुर, महासमुंद, धमतरी, राजनांदगांव, दुर्ग, गरियाबंद, जांजगीर-चांपा, बालोद, बलौदाबाजार शामिल हैं।

भ्रूण की जांच संभव, लेकिन विवाद के कारण शुरू नहीं

गर्भ में पल रहे भ्रूण की सिकलसेल जांच हो सकती है, लेकिन विवाद न हो इसलिए आंबेडकर समेत दूसरे मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पतालों में ये सुविधा शुरू नहीं की जा सकी है। डॉक्टरों का कहना है कि विवाद ये कि इस जांच के दौरान गर्भ में पल रहा भ्रूण मेल है या फिमेल, ये पता चल जाएगा।

मरीजों को फ्री में ब्लड देने का प्रावधान, दुर्ग में युवती की मौत

सिकलसेल के मरीजों को फ्री में ब्लड देने की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि उन्हें ब्लड फ्री में दिया जाता है। हाल में दुर्ग जिला अस्पताल में सिकलसेल पीड़ित युवती को ब्लड नहीं दिया गया, जिस कारण उसकी मौत हो गई। मामले की जांच चल रही है। डॉक्टरों के अनुसार आधुनिक दवाइयों से मरीजों को असहनीय दर्द से बड़ी राहत मिल रही है।

सिकलसेल के लक्षण इस तरह

  • शरीर में बार-बार दर्द होना।
  • खून की कमी यानी एनीमिया
  • थकान, पीलापन और कमजोरी
  • पीलिया, त्वचा व आंखों में पीलापन
  • हाथ व पैरों में दर्दनाक सूजन
  • छाती में तेज दर्द
  • सांस लेने में तकलीफ
  • ब्लड में ऑक्सीजन की कमी

सिकलसेल एनीमिया के मरीजों में ब्लड सप्लाई बाधित होने से कूल्हे के जोड़ तक ऑक्सीजन पहुंच नहीं पाती। इससे हड्डी गलने लगती है और हड्डी के सिरे (बॉल) खराब होने लगते हैं। शुरुआत में मरीजों को पेनकिलर दवाओं व थैरेपी दी जाती है, लेकिन राहत नहीं मिलती। इसका बेस्ट विकल्प हिप रिप्लेसमेंट होता है। - डॉ. सुनील खेमका, सीनियर ऑर्था सर्जन व डायरेक्टर श्री नारायणा अस्पताल

हम लोगों ने 1990 में सिकलसेल सोसाइटी का गठन किया था। समाज के लोगों में जागरुकता आ रही है और शादी के पहले सिकलसेल मिलान किया जा रहा है। ये अच्छी पहल है। इससे बीमारी को जड़ से खत्म करने में मदद मिलेगी। जाति विशेष के लोगों को चाहिए कि शादी के समय कुंडली मिलान के बजाय सिकलसेल मिलान करें। -डॉ. धीरेंद्र साव, संस्थापक सदस्य सिकलसेल सोसाइटी

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18 Jun 2026, 8:06 AM IST
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