रायपुर

Chhattisgarh BJP में चल क्या रहा, 2 महीने में 156 नेताओं ने छोड़ी पार्टी, कैबिनेट मंत्री के बड़े भाई ने भी दिया झटका, जानिए वजह

BJP Worker Resignation: बीजेपी को एक के बाद एक लगातार झटके मिल रहे हैं। कहीं बूथ अध्यक्ष पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं तो कहीं पार्षद नाराज होकर त्यागपत्र दे रहे है। बीते दो महीने में ऐसा क्या हुआ कि बीजेपी में खुलकर नाराजगी सामने आ रही है। आइए जानते हैं वजह..
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Sep 18, 2026
BJP Worker Resignation
बीजेपी नेता व पदाधिकारियों का इस्तीफा ( Photo - AI Generated )

Patrika Explainer: छत्तीसगढ़ में चुनाव को अभी दो साल का समय है। इससे पहले ही प्रदेश में बड़े बड़े सियासी घटनाक्रम हो रहे हैं। सत्तापक्ष बीजेपी सरकार को बीते 2 महीने से लगातार झटके मिल रहे हैं। बता दें कि 27 जुलाई से लेकर अब तक यानी 17 सितंबर तक तीन अलग-अलग जिलों में कुल 156 नेताओं ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया है। वहीं सबसे बड़ा झटका कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई गुरु ढालदास साहेब ने दिया है। अचानक कांग्रेस में शामिल होकर सभी को हैरान कर दिए। चुनावी साल से पहले बीजेपी में ऐसा क्या चल रहा है जो नेता एक-एक कर पार्टी से नाता तोड़ रहे हैं चलिए जानते है वजह..

BJP Worker Resignation: डोंगरगढ़ में खुलकर नाराजगी, शहर भाजपा मंडल के 111 ने दिया सामूहिक इस्तीफा

27 जुलाई को डोंगरगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। शहर भाजपा मंडल के 111 सदस्यों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसकी वजह भाजपा संगठन नेताओं से नाराजगी बताई जा रही है।​ नेताओं ने इस्तीफे के दौरान सोशल मीडिया के जरिए भी मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नौआना के कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। कहा कि संगठन में वरिष्ठ और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है। कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि संगठन के कई फैसले कुछ चुनिंदा नेताओं के प्रभाव में लिए जा रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता गया।

मामला नहीं थमा, 31 जुलाई को 26 नेताओं ने छोड़ी पार्टी

111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे के बाद मामला नहीं थमा। चार दिन बाद यानी 31 जुलाई को डोंगरगढ़ में ही पार्टी के 26 पदाधिकारियों और नेताओं ने भी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर संगठन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत को भेजे गए इस्तीफा पत्र में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नोतआना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि संगठन में परिवारवाद और गुटबाजी हावी हो गई है, जबकि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। इस्तीफा देने वालों में पूर्व भाजयुमो मंडल अध्यक्ष सुमित मिश्रा, पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष एम. तुलसी और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला मंत्री बलविंदर सिंह भाटिया जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

कैबिनेट मंत्री के भाई ने दिया झटका

प्रदेश कीे राजनीति में 11 सितंबर को बड़ी सियासी घटनाक्रम हुआ। कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई गुरु ढालदास साहेब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। पोरा तिहार के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में ढाल दास साहेब ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरु ढाल दास साहेब को कांग्रेस की सदस्यता की शपथ दिलाई। सतनामी समाज के गुरू और बड़े चेहरे का पार्टी में शामिल होना सियासी गणित बदल सकता है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने खुशी जताते हुए कहा कि ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी को मजबूती मिलेगी और पार्टी अपनी सिद्धांतों पर आगे मजबूती से आगे बढ़ेगी। बता दें कि ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने को राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

डोंगरगढ़ भाजपा में बगावत के बाद खैरागढ़ में भी विरोध के सूर उठ रहे हैं। जिले के पाड़ादाह भाजपा मंडल अध्यक्ष की कथित मनमानी और कार्यकर्ताओं के साथ पक्षपात के आरोपों के बाद 11 नेताओं ने इस्तीफा देकर बड़ा झटका दिया है। 17 सितंबर को मंडल के छह बूथ अध्यक्ष समेत 11 पदाधिकारियों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। रायपुर पहुंचे पदाधिकारियों ने प्रदेश महामंत्री नवीन मारकंडे को इस्तीफा सौंपा। इस दौरान सभी को समझाइश भी दी गई, लेकिन नेताओं अपना निर्णय वासस नहीं लिया।

मंडल अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष ने दी सफाई

इस मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष गोरेलाल वर्मा ने कहा कि पदाधिकारियों के इस्तीफा देने और किसी प्रकार की नाराजगी की जानकारी मुझे नहीं है। संगठन की ओर से सूचना नहीं मिली है। खैरागढ़ जिलाध्यक्ष डॉ. बिशेसर साहू ने कहा कि पाड़ादाह मंडल के पदाधिकारियों द्वारा इस्तीफा दिए जाने की जानकारी अब तक मेरे पास नहीं आई है। ऐसी कोई बात होगी तो संगठन स्तर पर बैठकर चर्चा करेंगे।

8 पार्षदों ने पार्टी से दिया त्यागपत्र

रायगढ़ जिले के पुसौर नगर पंचायत की राजनीति में अचानक ऐसा ट्विस्ट आया हैै। नगर पंचायत के भाजपा से जुड़े 8 निर्वाचित पार्षदों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक रूप से त्यागपत्र देने की पेशकश की है। पार्षदों ने इस संबंध में जिला भाजपा अध्यक्ष अरुणधर दीवान के नाम आवेदन देकर त्यागपत्र स्वीकार करने का अनुरोध किया है। एक साथ आठ पार्षदों के इस कदम ने पुसौर की सियासत में हलचल बढ़ा दी है।

इन पार्षदों के इस्तीफे की चर्चा

इस्तीफा के लिए पत्र सौपने वालों में वार्ड नंबर 6 से बलराम संवरा, वार्ड नंबर 14 से शौकीराम चौहान, वार्ड नंबर 11 से रूपेश कुमार साव, वार्ड नंबर 3 से मंजू पटेल, वार्ड नंबर 2 से फागुलाल प्रधान, वार्ड नंबर 1 से प्रदीप यादव, वरूण महाणा, नगर पंचायत उपाध्यक्ष उमेश साव के नाम शामिल हैं।

मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं

उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि बनने के बाद भी उनके वार्डों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। पानी, बिजली, सडक़ और नाली जैसे कामों को लेकर पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पार्षद निधि से प्रस्तावित और स्वीकृत कार्यों में भी अपेक्षित गति नहीं है। ऐसे में जनता के बीच जाकर जवाब देना पार्षदों के लिए मुश्किल हो रहा है। इसी नाराजगी के चलते आठों पार्षदों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक रूप से त्यागपत्र देने का फैसला किया है। आवेदन पर सभी आठ निर्वाचित पार्षदों के हस्ताक्षर होने की बात सामने आई है।

बीजेपी में क्या सब कुछ ठीक?

दो महीने में 156 नेताओं की पार्टी से इस्तीफे को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, कि क्या बीजेपी में सब कुछ ठीक चल रहा है। हालांकि अभी चुनाव को दो साल है, ऐेसे में अगर कहीं कोई खामियां मिल रही है तो पार्टी के आला नेता समय से पहले सुधारने की कोशिश करेंगे। दोनों प्रमुख पार्टियां जमीनी स्तर पर कार्यकताओं और नेताओं की नाराजगी दूर करने के लिए मंथन कर रहे हैं। वहीं इससे पहले बीजेपी को एक के बाद एक झटके मिलना आने वाले समय के लिए बुरा संकेत हो सकते है। फिलहाल देखना होगा कि बीजेपी इन मुश्किलों का कैसे सामना करती है। वहीं विपक्षी पार्टी इन घटनाक्रमों में कैसे भुनाती है।

इन तारीखों में बीजेपी को लगा झटका

27 जुलाई में डोंगरगढ़ में 111 नेताओं को सामूहिक इस्तीफा दिया।
31 जुलाई को भी 26 नेताओं ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया।
11 सितंबर को कैबिनेट मंत्री के बड़े भाई कांग्रेस में शामिल हो गए।
17 सितंबर को खैरागढ़ में छह बूथ अध्यक्ष सहित 11 पदाधिकारियों ने छोड़ी पार्टी।
17 सितंबर को 8 पार्षदों ने छोड़ा बीजेपी का साथ।

Updated on:
18 Sept 2026 04:27 pm
Published on:
18 Sept 2026 04:18 pm