
रायपुर@ अजय रघुवंशी। Chhattisgarh Water Project: जल संसाधन विभाग की दो बड़ी जल परियोजनाएं विवादों में हैं। एक तरफ 2550 करोड़ की लागत वाली सिकासेर-कोडार जलाशय पाइपलाइन परियोजना के टेंडर में गड़बड़ी के आरोप और किसान संगठनों की आपत्तियां हैं, तो दूसरी तरफ 100 साल पुरानी पैरी हाई डैम परियोजना भी रार के तकरार की वजह बन गई है। दोनों मामले जल संसाधन विभाग के अफसरों से लेकर जिम्मेदारों की टेबल तक पहुंच चुके हैं। सूत्रों के अनुसार अब विभाग दोनों प्रोजेक्ट पर नए सिरे से मंथन कर रहा है।
अफसरों का दावा है कि पैरी परियोजना उनकी प्राथमिकता में है, लेकिन महानदी जल विवाद के सुलझने का इंतजार है। विवाद की शुरुआत महासमुंद के कोडार जलाशय को जोड़ने वाली 90 किमी लंबी सिकासेर-कोडार लिंक परियोजना के 2550 करोड़ के टेंडर प्रक्रिया से हुई। अखिल भारतीय अभियंता संघ ने इस परियोजना का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया है कि इसके स्थान पर वर्षों पुरानी पैरी हाई डैम परियोजना को 2000 करोड़ से भी कम लागत में पूरा किया जा सकता है। इससे सात जिलों को फायदा होगा।
संघ का कहना है कि सिर्फ पाइपलाइन बिछाने की लागत से कम खर्च में एक स्थाई बांध निर्मित हो सकता है। कोडार परियोजना के टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं। शर्तों के उल्लंघन का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। इस पूरे घटनाक्रम का समय बेहद संवेदनशील है, क्योंकि दो दिन पहले ही नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में महानदी जल विवाद को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों व उच्च अधिकारियों के बीच बैठक हुई है। इससे महानदी जल विवाद के सुलझने की उम्मीदें हैं। इस बीच अखिल भारतीय अभियंता परिषद और किसान संगठनों ने सांसद, विभागीय सचिव और सरकार के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं और मांगें न माने जाने पर 8 अक्टूबर को प्रदेशभर में बैलगाड़ी रैली निकालने का ऐलान कर दिया है।
महज पाइपलाइन बिछाने के लिए 2550 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जबकि इसका लाभ केवल एक जिले को मिलेगा। टेंडर आवंटन प्रक्रिया में भी आरोप लगाए गए है। गर्मी के दिनों में केवल 20 से 30 प्रतिशत पानी की कमी पूरी करने के लिए 2500 करोड़ रुपए का भारी-भरकम प्रोजेक्ट तैयार करना। गरियाबंद के किसानों का कहना है कि उनके हक का पानी दूसरे जिले में मोड़ा जा रहा है। प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 200 हेक्टेयर वनभूमि और 35 हेक्टेयर निजी कृषि भूमि अधिग्रहित की जाएगी।
प्रदेश के सात प्रमुख जिलों में गहराते जल संकट का पैरी हाईडैम स्थाई समाधान है। गर्मी के मौसम में किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त जल और प्रमुख शहरों में पेयजल संकट दूर होगा। महानदी जल समूह की जल भंडारण क्षमता बढ़कर 64 टीएमसी तक पहुंच सकती है। कांकेर, रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार, दुर्ग और महासमुंद जिलों को जलापूर्ति, जिससे प्रदेश में औद्योगिक क्रांति को गति मिलेगी। मानसूनी बारिश का 31 टीएमसी व्यर्थ बह जाने वाला पानी बर्बाद होने से बचेगा। बढ़ते शहरीकरण और भविष्य की पेयजल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुल जल भंडारण क्षमता 102 टीएमसी तक हो सकता है।
राजेश कुमार टोप्पो, सचिव, जल संसाधन विभाग के मुताबिक, संगठनों से मिले प्रस्तावों और सुझावों का गहन अध्ययन किया जा रहा है। पैरी हाई डैम हमारी प्राथमिकता में शामिल है, लेकिन इसके लिए छत्तीसगढ़-ओडिशा महानदी जल विवाद के सुलझने का इंतजार है। सिकासर-कोडार बांध परियोजना की उपयोगिता और उद्देश्य अलग हैं।
ई. गिरधारी सागर, कार्यकारी राष्ट्रीय संयोजक, अखिल भारतीय अभियंता परिषद्को के मुताबिक, डार जलाशय परियोजना के बजाय सरकार को पैरी हाई डैम प्रोजेक्ट पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। वर्षों से लंबित यह परियोजना यदि बनती है, तो प्रदेश के 7 जिलों को सीधा लाभ मिलेगा और औद्योगिक क्रांति आएगी। आधुनिक तकनीक से डूबान क्षेत्र को भी काफी कम किया जा सकता है। हमने राज्य सरकार को यह सुझाव सौंपा है।
तेजराम साहू, सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग के मुताबिक, कोडार बांध में पर्याप्त जल उपलब्ध रहता है। पैरी हाई डैम बनाने के बजाय 2500 करोड़ रुपए महज एक पाइपलाइन प्रोजेक्ट में लगाना जनता के पैसों की खुली बर्बादी है। राज्य सरकार को इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए।