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पत्रिका एक्सक्लूसिव: रिमोट वर्क ने बदली महिलाओं की मानसिक सेहत, डिप्रेशन में 20% तक कमी, जानें रिसर्चर डॉ. पूर्ति नागेश ने क्या कहा

Women Depression: कोविड-19 के बाद रिमोट वर्किंग कामकाज का अहम हिस्सा बन गई है। घर से काम करने का असर कर्मचारियों की कार्यक्षमता के साथ उनकी मानसिक सेहत पर भी पड़ा है।
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रायपुर

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Khyati Parihar

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अनुराग सिंह

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Oct 08, 2026

Chhattisgarh News

रिसर्चर डॉ. पूर्ति नागेश (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@ अनुराग सिंह। Remote Work Women Mental Health: कोविड-19 के दौरान शुरू हुआ वर्क फ्रॉम होम अब केवल आपातकालीन व्यवस्था नहीं रह गया है। इसका कर्मचारियों के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। रायपुर में हुए एक अध्ययन के अनुसार, रिमोट वर्किंग महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य में काफी बदलाव हुए।

रिसर्चर डॉ. पूर्ति नागेश के अनुसार, महिलाओं के मामले में यह बदलाव अधिक महत्वपूर्ण रहा। वर्क फ्रॉम होम से पहले जहां महिलाएं घर की जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद ऑफिस जाती थीं, वहीं घर से काम करने की स्थिति में उन्हें नौकरी के साथ ही परिवार और घरेलू कामकाज को भी संभालना पड़ा। इससे ऑफिस जाने से जुड़े तनाव की तुलना में रिमोट वर्क के दौरान डिप्रेशन के स्तर में करीब 20 फीसदी तक कमी देखी गई। इससे कई मामलों में मानसिक थकान और भावनात्मक दबाव बढ़ा।

हाइब्रिड मॉडल को बताया अधिक संतुलित

अध्ययन में सामने आया कि रिमोट वर्क के दौरान आध्यात्मिक उपचार, सामाजिक जुड़ाव और बेहतर कनेक्टिविटी जैसे कारकों ने भी महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया। डॉ. पूर्ति नागेश ने आईटी सेक्टर से जुड़े 400 से अधिक कर्मचारियों पर किए अध्ययन में पाया कि रिमोट वर्किंग ने खासकर महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को अलग तरह से प्रभावित किया। हाइब्रिड वर्किंग मॉडल इन दोनों के बीच बेहतर संतुलन दे सकता है।

33% को बेहतर लगा वर्क-लाइफ बैलेंस

रिमोट वर्किंग से जुड़े विभिन्न अध्ययनों में भी कर्मचारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस में सुधार की बात सामने आई है। करीब 33 फीसदी कर्मचारी मानते हैं कि पूरी तरह रिमोट काम करने से वे व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन के बीच बेहतर संतुलन बना पाते हैं। समय और स्थान की अधिक स्वतंत्रता के कारण कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार काम को व्यवस्थित कर सकते हैं।

लेकिन घर ऑफिस बना तो बढ़ा अकेलापन

रिमोट वर्क का दूसरा पहलू कर्मचारियों का सामाजिक अलगाव है। ऑफिस में होने वाली अनौपचारिक बातचीत, चाय के दौरान साथियों से बातचीत और आमने-सामने संवाद खत्म होने से कई कर्मचारी अकेलापन महसूस करने लगे। टीम से जुड़ाव कम होने का असर भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी पड़ा। इसके अलावा घर और ऑफिस के बीच की सीमा भी धुंधली हो गई। साथ ही शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर भी समस्या देखने को मिली।