रायपुर

Chhattisgarh Dussehra: 30 साल सेना में सेवा, अब रावण के किरदार में दिखाते हैं दम, परिवार ने पहले किया था विरोध

Dussehra 2026: रायपुर के पूर्व सैनिक डीपी पटेल 30 साल सेना में सेवा देने के बाद पांच साल से रावण का किरदार निभा रहे हैं। जानिए परिवार के विरोध से लेकर रामलीला के मंच तक पहुंचने की उनकी दिलचस्प कहानी।
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Oct 20, 2026
Dussehra 2026
रावण बनने वाले पूर्व सैनिक डीपी पटेल (photo Patrika)

Dussehra 2026: @ताबीर हुसैन। रावण का किरदार निभाना आसान नहीं, क्योंकि हर साल उसके पुतले के दहन के साथ अहंकार के अंत का संदेश दिया जाता है। लेकिन बोरियाखुर्द में रावण बनने वाले पूर्व सैनिक डीपी पटेल इस किरदार को एक अलग नजरिए से देखते हैं। वे पांच साल से रावण की भूमिका निभा रहे हैं। करीब 30 साल तक सेना में सेवा देने वाले पटेल का मानना है कि रावण विद्वान, धनवान और शक्तिशाली था, उसके पास सब कुछ था, लेकिन अहंकार ने उसे खत्म कर दिया। यही इस किरदार से मिलने वाली सबसे बड़ी सीख है।

प्रसंगों और संवादों के जरिए अपने किरदार तैयार किये

पटेल बताते हैं कि रावण की भूमिका निभाने का मौका उन्हें स्थानीय आयोजन समिति के माध्यम से मिला। शुरुआत में परिवार ने उन्हें यह किरदार निभाने से मना किया, क्योंकि आम तौर पर लोग नकारात्मक भूमिका से बचना चाहते हैं। लेकिन पटेल ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया। उन्होंने रामायण से जुड़े प्रसंगों और संवादों के जरिए अपने किरदार को तैयार किया। वे कहते हैं कि रावण के संवादों में उसकी शक्ति और आत्मविश्वास झलकता है, लेकिन उसका अहंकार ही उसके पतन का कारण बना।

पैर फ्रैक्चर होने पर भी निभाई भूमिका

प्रदीप शर्मा ने पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद रामलीला में रावण की भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, शुरुआत में लोग उनके गेटअप को देखकर हंसते थे, लेकिन धीरे-धीरे अभिनय को पसंद करने लगे। आखिरकार उन्हें रावण के किरदार के लिए स्वीकार किया गया।

कुंभकरण से रावण बने चेतन

रामलीला से लंबे समय से जुड़े कलाकार चेतन चौहान भी करीब 2३ वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। जिले के नवापारा निवासी चेतन शुरुआत में कुंभकर्ण का किरदार निभाया और बाद में रावण की भूमिका तक पहुंचे। कलाकारों के लिए यह सफर सिर्फ मंच पर खड़े होने का नहीं, बल्कि हर साल अपने अभिनय को बेहतर बनाने और परंपरा को जीवित रखने का भी है। उन्होंने बताया कि पहले वे कुंभकरण बना करते थे लेकिन १२ वर्ष से रावण बन रहे हैं।

दादा की परम्परा को आगे बढ़ा रहे अमीनुल्लाह खान

जिले के कूंरा निवासी अमीनुल्लाह खान मेघनाथ, परशुराम, बाली, विष्णु, दशरथ और अहिरावण जैसे किरदार निभा चुके हैं। वे कई वर्षों से रावण की भूमिका निभा रहे हैं। अमीनुल्लाह बताते हैं कि उनके दादा नियामतउल्ला खान ने 1935 में यहां रामलीला की शुरुआत की थी। अब वे इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यहां 10 दिन तक रामलीला का मंचन होता है, जिसका समापन दशहरे पर रावण वध के साथ होता है। रामलीला की तैयारी करीब एक महीने पहले से शुरू हो जाती है। इसमें कुर्रा के स्थानीय लोगों की भी भागीदारी रहती है।

Updated on:
20 Oct 2026 01:55 pm
Published on:
20 Oct 2026 01:55 pm