रायपुर

पत्रिका एक्सक्लूसिव: छत्तीसगढ़ के जंगलों में फिर गूंजेगी दहाड़, एमपी से आएंगी 5 बाघिनें, आबाद होंगे ‘टाइगर कॉरिडोर’

Tiger Translocation: छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश से 5 बाघिनें लाई जाएंगी। टाइगर कॉरिडोर को पुनर्जीवित करने, AI ट्रैपिंग और बेहतर निगरानी से वन्यजीव संरक्षण को नई रफ्तार मिलेगी।
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Jul 29, 2026
Chhattisgarh Tiger Corridor
मप्र से छत्तीसगढ़ आएंगी 5 बाघिनें (photo source- Patrika)

राकेश टेंभुरकर/Chhattisgarh Tiger Corridor: देश में सबसे ज्यादा जंगलों वाले राज्यों में तीसरे नंबर पर रहने वाले छत्तीसगढ़ से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) के मुताबिक, राज्य में पेड़-पौधों और जंगलों के दायरे में 683.62 वर्ग किलोमीटर की शानदार बढ़ोतरी हुई है। लेकिन इसके ठीक उलट, जंगलों के राजा यानी बाघों की संख्या लगातार घटती जा रही है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की 2022 की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में सिर्फ 17 बाघ ही बचे थे। यह आंकड़ा वन्यजीव संरक्षण के दावों पर बड़े सवाल खड़े करता है। हालांकि, वन विभाग का दावा है कि अब तकनीक और बेहतर निगरानी से हालात सुधरे हैं और 2026 में प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़कर 35 से ज्यादा हो गई है।

अवैध शिकार: जंगलों के भीतरी इलाकों में शिकारियों की सक्रियता बड़ा खतरा बनी हुई है।
खनन और उद्योग: अंधाधुंध खदानों के कारण बाघों के प्राकृतिक ठिकाने और रास्ते खत्म हो रहे हैं।

मानव-वन्यजीव संघर्ष: जंगलों में इंसानी दखल बढ़ने से बाघों और इंसानों के बीच टकराव बढ़ा है।
कमजोर नीतियां: संरक्षण से जुड़ी योजनाएं जमीनी स्तर पर पूरी सख्ती से लागू नहीं हो सकीं।

मप्र से बाघिन लाकर कुनबा बढ़ाने की तैयारी

छत्तीसगढ़ में बाघों का कुनबा फिर से बसाने के लिए सरकार और एनटीसीए ने एक बड़ी योजना बनाई है। इसके तहत पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से 3 बाघिन लाने की प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है। इन्हें अचानकमार और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा। वहीं, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में अभी 2 बाघ मौजूद हैं। यहां बाघों का परिवार बढ़ाने के लिए मप्र से 2 और बाघिन लाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिसकी मंजूरी जल्द मिलने की उम्मीद है।

फिर गुलजार हो रहे पुराने 'टाइगर कॉरिडोर'

उदंती-सीतानदी और इंद्रावती इलाकों में अतिक्रमण और शिकार के खिलाफ चलाए गए अभियानों के अच्छे नतीजे दिख रहे हैं। बरसों से बंद पड़े बाघों के आने-जाने के रास्ते (कॉरिडोर) फिर से सक्रिय हो रहे हैं। महाराष्ट्र के ताडोबा टाइगर रिजर्व से शुरू होकर छत्तीसगढ़ के इंद्रावती और ओडिशा के सुनाबेड़ा तक फैला विशाल कॉरिडोर एक बार फिर बाघों की चहल-पहल का गवाह बन रहा है।

Chhattisgarh Forest News: फैक्ट फाइल: छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों का हाल

कुल टाइगर रिजर्व: 4 (इंद्रावती, अचानकमार, उदंती-सीतानदी, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला)
कुल वन क्षेत्र: 59772 वर्ग किलोमीटर

एनटीसीए रिपोर्ट (2022): 17 बाघवन विभाग का वर्तमान दावा (2026): 35 से अधिक बाघ
हाईटेक सुरक्षा: एआई आधारित कैमरा ट्रैपिंग, जीपीएस पेट्रोलिंग और ड्रोन से निगरानी।

Updated on:
29 Jul 2026 09:34 am
Published on:
29 Jul 2026 09:33 am