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River Cleaning Project: सिस्टम नहीं कर पा रहा नदियों की सफाई, छत्तीसगढ़ को भी चाहिए बिट्टू तबाही

River Cleaning: छत्तीसगढ़ की नदियों में 280 MLD गंदा पानी पहुंच रहा है। 2000 करोड़ खर्च के बावजूद नदी प्रदूषण पर लगाम नहीं लग पाई है। सिस्टम की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
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River Cleaning Project

नदियों में फैली गंदगी (Photo Patrika)

River Cleaning in Chhattisgarh: नदियों की सफाई और स्वच्छता के नाम पर बीते 3-4 वर्षों में 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट खर्च करने के बावजूद प्रदेश की नदियों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया है। शहरों का सीवरेज, घरों व दुकानों का गंदा पानी और उद्योगों का रासायनिक कचरा सीधे जलस्रोतों में मिल रहा है। प्रदेश में वर्तमान में केवल 25 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) काम कर रहे हैं, जबकि सभी नगरीय निकायों में 200 से अधिक एसटीपी की दरकार है।

21 वर्षीय युवक बिट्टू तबाही की देश-विदेश में तारीफ

हाल ही में मध्यप्रदेश के ब्यावरा में अजनार नदी को साफ करने में जुटे 21 वर्षीय युवक बिट्टू तबाही (सुरेंद्र सिंह चौधरी) की देश-विदेश में तारीफ हो रही है। लोग कह रहे हैं कि हमारे सिस्टम और निकायों को भी बिट्टू तबाही जैसे सेवाभाव और समर्पण से प्रेरणा लेने की जरूरत है। पत्रिका की पड़ताल के अनुसार, राज्य में रोजाना करीब 743 एमएलडी गंदा पानी निकलता है, लेकिन ट्रीटमेंट की क्षमता सिर्फ 458.3 एमएलडी ही है। यानी रोजाना 280 एमएलडी से अधिक प्रदूषित पानी बिना किसी उपचार के सीधे महानदी, शिवनाथ, खारून और हसदेव जैसी जीवनदायिनी नदियों में बह रहा है

192 स्थानीय निकायों में व्यवस्था अधूरी

प्रदेश के सभी 192 निकायों में सीवरेज ट्रीटमेंट सिस्टम लगाने की योजनाएं सालों से चल रही हैं, लेकिन अधिकतर फाइलें प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अटकी हैं। रायपुर सहित कई बड़े शहरों में नालों का सीवरेज सीधे नदियों और तालाबों में गिर रहा है। घरेलू कचरे के अलावा फैक्ट्रियों और बाजारों का जहरीला पानी भी संकट बढ़ा रहा है।

करोड़ों खर्च, कोर्ट की फटकार भी बेअसर

नदी-तालाबों को बचाने के लिए 2000 करोड़ से अधिक का बजट खर्च होने के बावजूद हालात जस के तस हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और हाईकोर्ट कई बार निकायों को फटकार लगा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस असर नहीं दिख रहा। नदियों को जहरीला बनाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर सख्त कार्रवाई के बजाय कागजी खानापूर्ति की जा रही है। पर्यावरण विभाग ने 31 हजार प्रकरणों में केवल 386 रुपए प्रति प्रकरण की औसत दर से मामूली जुर्माना वसूला है।

कौन हैं 'बिट्टू तबाही'?

मध्यप्रदेश के ब्यावरा निवासी बीएससी छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी (बिट्टू तबाही) ने 26 जनवरी 2026 को अजनार नदी को साफ करने का संकल्प लिया था। प्लास्टिक, जलकुंभी और गाद से पटी नदी को अपनी टीम के साथ साफ करने के उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। सीएम मोहन यादव ने उन्हें बुलाकर सम्मानित किया, वहीं पूर्व क्रिकेटर केविन पीटरसन, उद्योगपति आनंद महिंद्रा और कई कॉर्पोरेट हस्तियों ने उनकी सराहना की है।

इन नदियों को प्रदूषण से बचाना जरूरी

महानदी, इंद्रावती, शिवनाथ, खारून, हसदेव, अरपा, मनियारी, केलो, सोंढूर और पैरी नदी।

फैक्ट फाइल:

कुल जिले: 33
स्थानीय नगरीय निकाय: 192

नगर निगम: 14
नगर पंचायत: 121

एसटीपी की वर्तमान स्थिति

आपरेशनल (सक्रिय): 25 प्लांट (क्षमता: 458.3 एमएलडी)

अंडर कंस्ट्रक्शन (निर्माणाधीन): 03 प्लांट (क्षमता: 26.0 एमएलडी)
प्लानिंग प्रोजेक्ट (प्रस्तावित): 13 प्लांट (क्षमता: 343.7 एमएलडी)