
अचानकमार की टाइगर मुहिम सुस्त (photo source- Patrika)
राकेश टेंभुरकर/Chhattisgarh Tiger Reserve: अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर ) में बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए साढ़े 5 साल पहले शुरू की गई वन विभाग की एक महत्वाकांक्षी पायलट परियोजना बुरी तरह फ्लॉप हो गई है। आम नागरिकों के सहयोग से वन्यजीवों को बचाने के लिए खोला गया बैंक खाता अब बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। लंबे समय से किसी भी प्रकार का लेन-देन न होने के कारण एचडीएफसी बैंक ने सुरक्षा कारणों से इस खाते को 'निष्क्रिय घोषित कर दिया है।
विभाग ने पोस्टर, बैनर और विज्ञापनों के जरिए इसका जमकर प्रचार-प्रसार किया था, लेकिन हकीकत यह है कि इतने सालों में इस खाते में 10 हजार रुपए भी जमा नहीं हो सके। इस योजना को शुरू करते समय वन विभाग ने दावा किया था कि नागरिकों की भागीदारी से न केवल वन्यप्राणियों का संवर्धन होगा, बल्कि मानव-वन्यजीव द्वंद्व को कम करने में भी मदद मिलेगी।
ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से न्यूनतम एक रुपए से लेकर स्वेच्छा से कितनी भी राशि जमा करने का विकल्प दिया गया था, लेकिन जनता ने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। पायलट प्रोजेक्ट भले ही दम तोड़ चुका हो, लेकिन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और राज्य सरकार की ओर से एटीआर को हर साल 1 करोड़ से लेकर 3 करोड़ रुपए तक का फंड मिलता है। यह बजट रिजर्व के क्षेत्रफल, बाघों व अन्य वन्यजीवों की संख्या और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर तय होता है।
एटीआर के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर द्वारा जनवरी 2022 में बिलासपुर स्थित एचडीएफसी बैंक में अचानकमार टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन के नाम से एक खाता खोला गया था। विभाग ने इसका खाता नंबर 50200025484509 और आईएफएससी कोड एचडीएफसी0003659 को सार्वजनिक करते हुए अपील की थी कि इसमें दान करने वालों को आयकर की धारा 80जी के तहत छूट मिलेगी और उनका नाम भी गोपनीय रखा जाएगा।खाता खोलने के बाद विभाग भी इसके फॉलोअप और मॉनिटरिंग को भूल गया, जिससे आज खाता सुप्त अवस्था में चला गया है।
वन विभाग ने इस जन-सहयोग राशि का उपयोग करने के लिए एक विस्तृत खाका तैयार किया था। इसके तहत प्राप्त होने वाली राशि से बाघों के रहवास (हैबिटैट) का विकास करना, वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना, शोध कार्यों को बढ़ावा देना, स्थानीय आदिवासी समुदायों को रोजगार से जोड़ना और शिक्षा व ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देना तय किया गया था। मकसद साफ था कि गिनती के बचे बाघों को बचाने के लिए समाज में सहानुभूति का भाव पैदा किया जाए।
वर्जन
एटीआर में काफी समय पहले बाघों के संरक्षण के लिए बैंक खाता खोला गया था। वर्तमान में उसमें कितनी रकम है, लेन-देन की क्या स्थिति है और उसका मौजूदा स्टेटस क्या है, इसकी सटीक जानकारी संबंधित बैंक से स्टेटमेंट लेने के बाद ही मिल पाएगी- अरुण कुमार पाण्डेय (वन बल प्रमुख एवं पीसीसीएफ
वन अपराध और तस्करी रोकने के लिए छत्तीसगढ़, तेलंगाना, महाराष्ट्र और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो( डब्ल्यूसीसीबी) की टीम का गठन किया गया है। यह संयुक्त टीम राज्य के सीमावर्ती क्षेत्र में निगरानी करेगी। साथ ही तस्करों के नेटवर्क को पकड़ने के अभियान चलाऐगी। इसके लिए तीनों ही राज्यों के वन विभाग और डब्ल्यूसीसीबी के अधिकारियोंं द्वारा संयुक्त रणनीति बनाई गई है।
वन अपराधों पर कार्रवाई करने के लिए साझा डिजिटल संचार प्रणाली विकसित की जाएगी। साथ ही त्वरित सूचना के आदान-प्रदान के लिए व्हाट्सएप समन्वय समूह भी बनाया जाएगा। जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय रैकेट से जुडे़ लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा सकें। बता दें कि 20 जुलाई को बीजापुर स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व मुख्यालय में तीनों राज्यों के वरिष्ठ वन अधिकारियों की बैठक हुई। इस दौरान तस्करी करने वालों के अंतरराज्यीय रैकेट को पकड़ने और सूचनाओं का आदान-प्रदान करने पर सहमति बनी है।
राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में जंगलों की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण, वन अपराधों की रोकथाम के लिए वन विभाग के चेकपोस्ट को अत्याधुनिक किया जाएगा। साथ ही नई सुरक्षा चौकी का गठन होगा। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्र में वन्यजीव गलियारों में नियमित संयुक्त गश्त तथा एंटी-स्नेयर वॉक चलाए जाएंगे। वहीं बाघ, तेंदुआ, वन भैंसा सहित अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विशेष एंटी-पोचिंग नाइट पेट्रोलिंग भी बढ़ाई जाएगी। ताकि रियल-टाइम सूचना साझा कर त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिल सके।
तस्करी और वन अपराध को रोकने के लिए संयुक्त टीम काम करेगी। किसी भी तरह के इनपुट मिलने पर साझा कार्रवाई करने के साथ ही डब्ल्यूसीसीबी की मदद से नेटवर्क को पकड़ा जाएगा- अरुण कुमार पाण्डेय वन बल प्रमुख एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक
Updated on:
24 Jul 2026 07:00 am
Published on:
24 Jul 2026 06:53 am
