रायपुर

950 करोड़ की स्मार्ट सिटी भी पानी में डूबी, रायपुर समेत चार बड़े शहरों में मानसून ने खोली विकास की पोल, सड़कें भी धंसीं

Raipur News: प्रदेश के प्रमुख शहरों को स्मार्ट और आधुनिक बनाने के लिए अरबों रुपए खर्च किए गए, लेकिन मानसून की पहली तेज बारिश ने विकास के दावों की हकीकत सामने ला दी।
3 min read
Jul 19, 2026
Chhattisgarh News
सड़कें धंसीं (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Chhattisgarh News: प्रदेश के प्रमुख शहरों को चमकाने और उन्हें आधुनिक बनाने के लिए कागजों पर तो अरबों रुपए के बजट स्वीकृत किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बदहाल है। रायपुर समेत बिलासपुर, भिलाई और जगदलपुर जैसे बड़े शहरों में मानसून आते ही पूरा सिस्टम पानी-पानी हो जाता है। करोड़ों की ड्रेनेज (जल निकासी) योजनाएं फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई हैं, जिसका खामियाजा हर साल आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

रायपुर: 950 करोड़ की स्मार्ट सिटी, पर 200 करोड़ का ड्रेनेज प्लान अटका

रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर अब तक 950 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। भारी-भरकम बजट को कॉम्प्लेक्स निर्माण, मल्टीलेवल पार्किंग और सौंदर्यीकरण जैसी सतही चीजों में खपा दिया गया, लेकिन शहर की बुनियादी जरूरत यानी 'ड्रेनेज सिस्टम' पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। शहर आज भी जलभराव के मामले में 25 साल पुरानी स्थिति में खड़ा है।

5 जुलाई को हुई कुछ ही घंटों की बारिश में पूरा रायपुर शहर डूब गया था, जिसके बाद नगर निगम को प्रभावित इलाकों में 400 से ज्यादा फूड पैकेट बांटने पड़े थे। रायपुर को केंद्रीय आपदा प्रबंधन के दायरे में शामिल कर ड्रेनेज सुधार के लिए 200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। इसमें 75 फीसदी राशि केंद्र और 25 फीसदी राशि राज्य सरकार को देनी थी। निगम के इंजीनियरों ने नालों का नक्शा भी तैयार किया, लेकिन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी न तो फंड स्वीकृत हुआ और न ही काम शुरू हो सका।

जलभराव की समस्या कोई एक दिन में पैदा नहीं हुई है। पूर्व की परिषदों ने ड्रेनेज सिस्टम पर काम नहीं किया और रसूखदारों-बिल्डरों को नालों पर कब्जे करने दिए। हमारी परिषद इस समय आधा दर्जन बड़े नालों का निर्माण पूरा करा रही है और कब्जों को हटाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। -मीनल चौबे, महापौर, रायपुर नगर निगम

बिलासपुर: 100 करोड़ के 28 नालों का प्रस्ताव फाइलों में कैद

बिलासपुर में हाल ही में हुए 'मेघ विस्फोट' ने निगम के दावों की पोल खोलकर रख दी है। बिलासपुर को जलभराव से मुक्ति दिलाने के लिए बनाई गई 100 करोड़ रुपए की जल निकासी योजना ठंडे बस्ते में है। इस योजना के तहत 28 बड़े नालों और स्टॉर्म वाटर ड्रेन का निर्माण होना था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण सर्वे ही पूरा नहीं हो सका, जिससे फाइनल प्रस्ताव अटक गया।

हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद अरपा नदी को बचाने के लिए शहर के 70 नालों का पानी साफ कर नदी में छोड़ने की योजना थी। इसके लिए दोमुहानी और चिल्हाटी में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तो बन गए, लेकिन नालों को इनसे आज तक नहीं जोड़ा जा सका। बिलासपुर निगम हर साल बारिश से पहले नालों की सफाई के नाम पर 10 करोड़ रुपए फूंक देता है, लेकिन पहली बारिश में ही जरहाभाठा, सरकंडा-कोनी, नेहरू नगर और मंगला क्षेत्र जैसे पॉश इलाके घुटनों तक पानी में डूब जाते हैं।

महापौर का पक्ष (बिलासपुर): नए नालों के निर्माण के लिए वर्तमान में सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद शासन को मंजूरी के लिए अंतिम प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके अलावा पुराने नालों को एसटीपी से जोड़ने का काम मानसून के तुरंत बाद शुरू कर दिया जाएगा। -पूजा विधानी, महापौर, बिलासपुर

भिलाई: मानसून के लिए कोई अलग फंड नहीं

भिलाई नगर निगम में बारिश के दौरान जलभराव और नाला जाम होने जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए कोई अलग से विशेष मद (फंड) तय नहीं है। निगम के स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली के मुताबिक, शहर की सफाई व्यवस्था के लिए इस वर्ष स्वीकृत 50 करोड़ रुपए के वार्षिक बजट से ही मानसून के दौरान बड़े नालों और नालियों की सफाई कराई जा रही है। निगम का दावा है कि मानसून के दौरान जलभराव और मच्छर जनित या जल जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए आपदा प्रबंधन की टीम को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।

जगदलपुर: 11.50 करोड़ के प्रोजेक्ट से उम्मीदें

बस्तर संभाग के मुख्य शहर जगदलपुर के निचले वार्डों और नए विकसित हो रहे पॉश इलाकों में भी सालों से जलभराव की समस्या बनी हुई है। हालांकि, इस साल सामान्य बारिश के कारण अब तक हालात बेकाबू नहीं हुए हैं। जगदलपुर नगर निगम इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए वर्तमान में 11.50 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।

महापौर संजय पांडेय के अनुसार, शहर में 3 करोड़ रुपए की लागत से बड़े व छोटे नाले बनाए जा रहे हैं, जबकि 5.50 करोड़ रुपए के अन्य नालों के निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही 3 करोड़ रुपए की पुलिया का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में जलभराव की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

Updated on:
19 Jul 2026 11:36 am
Published on:
19 Jul 2026 11:36 am