
पानी का वार, इंजन बीमार (फोटो सोर्स- पत्रिका)
रायपुर@ताबीर हुसैन। Vehicle Damage After Rain: बिलासपुर में हुई रेकॉर्डतोड़ बारिश ने पिछले 100 वर्षों का रेकॉर्ड ध्वस्त कर दिया, जिससे शहर की सड़कें कई फीट गहरे मटमैले समंदर में तब्दील हो गईं। इस आसमानी आफ़त ने न केवल आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त किया, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग की रफ़्तार पर भी पानी फेर दिया। पानी उतरने के बाद शहर में वाहनों के दम तोड़ने का एक नया और डरावना मंजर सामने आया है। हालत यह है कि शनिवार को शहर का शायद ही कोई अधिकृत सर्विस सेंटर या गैराज खाली रहा हो, जहां खराब वाहनों की लंबी कतारें न लगी हों।
'पत्रिका पड़ताल' के ग्राउंड सर्वे के अनुसार, इस जल-प्रलय के कारण बिलासपुर में लगभग 3 हजार दोपहिया, 350 कारें और 150 ऑटो पूरी तरह बीमार (खराब) हो चुके हैं। शहरभर में इंजन जाम होने, सेंसर फेल होने, बैटरी डिस्चार्ज होने और वायरिंग शॉर्ट होने की बाढ़ आ गई है। ऑटो मैकेनिकों के मुताबिक, दोपहिया वाहनों के फिल्टर व साइलेंसर में पानी घुसने और आधुनिक कारों के इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ईसीयू) के ठप होने से ऑटोमोबाइल वर्कशॉप पूरी तरह फुल हैं, यहाँ तक कि क्रेन और टो-व्हीकल के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
एनआईटी रायपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. एनवी स्वामी नायडू ने बताया कि पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए जलभराव सबसे घातक साबित होता है, जिसे तकनीकी भाषा में 'हाइड्रोलॉक' कहा जाता है। जब पानी एयर-इनटेक (हवा प्रवेश मार्ग) के रास्ते इंजन के सिलेंडर तक पहुंच जाता है, तब इंजन का पिस्टन पानी को कम्प्रेस (दबा) नहीं पाता।
भौतिकी का यह साधारण नियम गाड़ी के लिए काल बन जाता है, कनेक्टिंग रॉड मुड़ जाती है और क्रैंकशाफ्ट टूट जाते हैं। कई मामलों में पूरा इंजन बदलने की नौबत आ जाती है। प्रो. नायडू के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में मैकेनिकल हाइड्रोलॉक का खतरा भले कम हो, लेकिन लंबे समय तक डूबे रहने से उनका हाई-वोल्टेज बैटरी पैक और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
ऑटोमोबाइल तकनीकी विशेषज्ञ अनिल कुमार ने आगाह किया कि पानी में बंद हुई गाड़ी को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश जेब पर भारी परोक्ष प्रहार है। सामान्य फ्लूइड बदलने और बेसिक सर्विसिंग का खर्च जहां 5 से 20 हजार रुपए आता है, वहीं इंजन के अंदरूनी नुकसान की मरम्मत 50 हजार से 2 लाख रुपए तक पहुंच जाती है।
ईवी की बैटरी या इंजन बदलने पर यह बजट कई लाख का हो सकता है। राहत की बात यह है कि 'कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस' (व्यापक बीमा) में जलभराव का नुकसान कवर होता है (थर्ड पार्टी इंश्योरेंस धारकों को कुछ नहीं मिलता)। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मोड़ यह है कि यदि सर्वे में यह साबित हो गया कि वाहन बंद होने के बाद भी चालक ने बार-बार 'सेल्फ' मारकर उसे स्टार्ट करने का प्रयास किया, तो बीमा कंपनियां इसे 'सोची-समझी लापरवाही' मानते हुए क्लेम को सिरे से खारिज कर देती हैं।
Updated on:
20 Jul 2026 09:40 am
Published on:
20 Jul 2026 09:39 am
