28 अक्टूबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पापुनि में 192 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी, राज्य संपरीक्षा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, पुस्तक छपाई से 30.10 करोड़ का नुकसान

Textbook Corporation Audit: छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम (पापुनि) की कार्यप्रणाली पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Khyati Parihar

•

image

राहुल जैन

•

Updated: 20 Jul 2026, 7:55 AM IST

Chhattisgarh Textbook Corporation

छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@ राहुल जैन। Chhattisgarh Textbook Corporation Audit: छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 में छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम (पापुनि) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक के ऑडिट में कुल 9 प्रमुख आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जिनमें 192 करोड़ 34 लाख 95 हजार 595 रुपए की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट में बैंक संचालन, अनुदान वितरण, मुद्रण कार्यों के भुगतान, पाठ्यपुस्तकों की छपाई और वाहन किराया भुगतान तक में गंभीर गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है। आवश्यकता से अधिक पुस्तकों की छपाई के मामले में 30.10 करोड़ के ऑडिट में आपत्ति की गई है।

राज्य संपरीक्षा की रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ी आपत्ति 72.05 करोड़ रुपए की है। इसमें सक्षम अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर के बिना चेकों का संचालन कर भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। इसके अलावा मुद्रण कार्यों के लिए सामग्री खरीद नियम-2002 के विपरीत भुगतान करने से 69.84 करोड़ रुपए की अनियमितता दर्ज की गई है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निगम ने विभिन्न क्षेत्रों के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को स्वच्छ अनुदान राशि वितरित कर निगम निधि का दुरुपयोग किया, जिससे 96.13 लाख रुपए की आपत्ति दर्ज हुई। वहीं ग्रीन बोर्ड और रेट्रोरिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड की खरीद में वित्तीय नियमों की अनदेखी कर 6.70 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

बैंक खाते और लेखांकन पर सवाल

संपरीक्षा में पाया गया कि निगम के बैंक समाधान पत्रकों का समुचित संधारण नहीं किया गया, जिससे 3.29 करोड़ रुपए की आपत्ति दर्ज की गई। इसके अलावा 8.50 करोड़ रुपए की राशि को लेखों में दर्ज किए बिना व्यय कर दिए जाने से संभावित द्वितीय व्ययन (डबल बुकिंग) की स्थिति निर्मित हुई।

बिना स्वीकृति तामझाम पर खर्च

शासन की पूर्व स्वीकृति के बिना अधिकारियों और कर्मचारियों को विभिन्न सुविधाएं एवं तामझाम उपलब्ध कराने पर 34.10 लाख रुपण् खर्च किए गए, जिसे भी अनियमित माना गया है। निगम द्वारा वाहन किराया मद में भी नियमों के विपरीत भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में 55.90 लाख रुपए की वित्तीय आपत्ति दर्ज की गई है।

5 साल बाद भी नहीं दिया पालन प्रतिवेदन

रिपोर्ट (Chhattisgarh Textbook Corporation Audit) में यह भी उल्लेख है कि मार्च 2022 में अंकेक्षण प्रतिवेदन जारी होने के बावजूद पाठ्य पुस्तक निगम ने पिछले पांच वर्षों में कोई पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया। राज्य संपरीक्षा ने फरवरी और अप्रैल 2026 में निगम को पत्र भेजकर जवाब मांगा, लेकिन निर्धारित अवधि तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद इन आपत्तियों को राज्य संपरीक्षा की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 में शामिल किया गया।

प्रमुख आपत्तियां एक नजर में

  • आपत्ति- राशि
  • बैंक समाधान पत्रक का अभाव- 3.29 करोड़
  • अनुदान वितरण में निधि का दुरुपयोग- 96.13 लाख
  • लेखों में दर्ज किए बिना व्यय- 8.50 करोड़
  • मुद्रण सामग्री खरीद में नियम विरुद्ध भुगतान- 69.84 करोड़
  • साइन बोर्ड खरीद में अनियमितता- 6.70 करोड़
  • संयुक्त हस्ताक्षर बिना चेक संचालन- 72.05 करोड़
  • आवश्यकता से अधिक पुस्तक छपाई- 30.10 करोड़
  • बिना स्वीकृति अधिकारियों-कर्मचारियों पर व्यय-34.10 लाख
  • वाहन किराया का अनियमित भुगतान- 55.90 लाख