
रायपुर. जीएसटी के एक साल बीतने के बाद भी कई डीलरों की नींद नहीं खुली है। वस्तु एवं सेवा कर के अंतर्गत प्रदेश के सैकड़ों डीलर्स ने जीएसटीआर-3बी रिटर्न फाइल नहीं किया है, जिसके बाद सेंट्रल और स्टेट जीएसटी ने लगभग 10 हजार डीलरों पर निगरानी के लिए अपने इंवेस्टीगेशन और इनफोर्समेंट विंग को निर्देश दिए गए हैं, वहीं कई लोगों को नोटिस जारी किया गया है। जीएसटी के दायरे में आने वाले डीलरों को हिदायत दी गई है कि वे समय पर रिटर्न दाखिल करे।
सेंट्रल जीएसटी ने जहां डेढ़ करोड़ से ऊपर टर्नओवर वाले 3500 से अधिक डीलरों को नोटिस जारी किया है, वहीं स्टेट जीएसटी के जरिए 7000 से अधिक डीलरों को मोबाइल और इ-मेल के जरिए संदेश भेजा जा चुका है। डीलरों को हर महीने जीएसटीआर-३बी फाइल करने की जिम्मेदारी है, लेकिन कई डीलर्स ऐसे हैं, जिन्होंने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन तो करा लिया है, लेकिन रिटर्न फाइल करना जरूरी नहीं समझा। इसका असर राजस्व पर हुआ है। जीएसटी को इस महीने १ जुलाई को एक वर्ष पूरा हुआ है, जिसके बाद सेंट्रल और स्टेट जीएसटी ने अपने राजस्व की समीक्षा की है।
अब पेनाल्टी के साथ होगी वसूली: जीएसटी नहीं देने वाले डीलरों से नियमों के तहत अब पेनाल्टी वसूल की जाएगी, वहीं पेनाल्टी जमा नहीं करने के एवज में अन्य कानूनी कार्यवाही के बारे में विचार किया जा रहा है।
कंपोजिशन सीमा में डेढ़ करोड़ तक के टर्नओवर वाले डीलर्स को छूट के बाद स्टेट और सेंट्रल जीएसटी को सबसे अधिक ज्यादा राजस्व डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों से प्राप्त होता है, जिसमें सिर्फ 15 फीसदी डीलर है, लेकिन इनमें बड़ी स्टील, ऑटोमोबाइल्स, मशीनरी, सीमेंट, आयरन, स्पंज, रोलिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक्लस आदि कंपनियां और डीलर्स शामिल हैं।
स्टेट जीएसटी कुल नोटिस-7000 से अधिक
स्टेट जीएसटी को 1 जुलाई 2017 से अब तक जीएसटी की क्षतिपूर्ति के रूप में लगभग 1900 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हो चुकी है। इसमें से बीते महीने विभाग को 100 करोड़ से अधिक की राशि केंंद्र सरकार की ओर से प्राप्त हुई है। जीएसटी लागू होने के बाद स्टेट जीएसटी को बीते वर्ष सितंबर महीने में कुल राशि लगभग 253 करोड़ रुपए प्राप्त मिली थी, हालांकि स्टेट जीएसटी ने 2000 करोड़ रुपए से अधिक की भरपाई की गुजारिश की थी।
राज्य कर आयुक्त पी. संगीता ने कहा कि जीएसटीआर-3बी फाइल नहीं करने वाले डीलर्स को मैसेज और ई-मेल भेजा जा रहा है। लगभग 80 फीसदी डीलर्स ने रिटर्न फाइल कर दिया है। डीलर्स की मांग के बाद अन्य व्यवहारिक और तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए जीएसटी काउंसिल को प्रस्ताव भेजा गया है।