
Chhattisgarh Viral News: सोशल मीडिया पर इन दिनों 80 के दशक की यादें तस्वीरों के जरिए लौट रही हैं। फेसबुक पर चल रहे एट्टीज ट्रेंड में आम लोगों से लेकर खास चेहरे भी शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव व विजय शर्मा की तस्वीरें भी इस रेट्रो ट्रेंड का हिस्सा बनकर चर्चा में हैं। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी अपनी तस्वीर साझा की है। लोग अपनी मौजूदा तस्वीरों को एट्टीज के अंदाज में बदलकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं।
तस्वीरों में उस दौर के कपड़े, हेयरस्टाइल, चश्मे, बैकग्राउंड और फिल्म कैमरे जैसी तस्वीर की गुणवत्ता दिखाई दे रही है। इस ट्रेंड की खासियत यह है कि इसमें उम्र की कोई सीमा नहीं है। युवा जहां एट्टीज के फैशन और विंटेज लुक को आजमा रहे हैं, वहीं 40 और 50 की उम्र के लोग इसे अपने बचपन और पुराने दिनों की यादों से जोड़ रहे हैं। कई लोग अपनी आज की तस्वीर के साथ उसका रेट्रो वर्जन साझा कर रहे हैं।
एट्टीज ट्रेंड को लोकप्रिय बनाने में एआई फोटो एडिटिंग टूल्स की अहम भूमिका है। अब पुराने जमाने की तस्वीर जैसा लुक तैयार करने के लिए फोटो स्टूडियो या जटिल एडिटिंग की जरूरत नहीं। कुछ निर्देश देकर तस्वीर में 1980 के दशक के कपड़े, हेयरस्टाइल, रंग, बैकग्राउंड और कैमरा इफेक्ट जोड़े जा सकते हैं।
इस ट्रेंड की लोकप्रियता को सिर्फ फैशन या फोटो एडिटिंग से जोडक़र नहीं देखा जा रहा। इसके पीछे नॉस्टैल्जिया यानी बीते दौर की यादों का आकर्षण भी है। अस्सी का दौर देख चुके लोगों को ये तस्वीरें बचपन, स्कूल, परिवार, पुराने मोहल्ले और उस समय की जीवनशैली की याद दिला रही हैं। वहीं नई पीढ़ी के लिए एट्टीज का अंदाज कुछ अलग और विंटेज नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर लगातार बदलते ट्रेंड के बीच यह चलन बता रहा है कि नई तकनीक के दौर में भी लोगों का दिल कभी-कभी पुराने दिनों की तस्वीरों में लौटना चाहता है।
पुराने दौर की तस्वीरों और यादों के प्रति आकर्षण को नॉस्टैल्जिया से जोडक़र देखा जा सकता है। जब लोग एट्टीज के लुक में अपनी तस्वीरें देखते हैं तो उन्हें अपने बचपन, परिवार, स्कूल और उस समय के रिश्तों की याद आती है। आज की तेज रफ्तार और तकनीक आधारित जिंदगी में पुरानी यादें व्यक्ति को भावनात्मक सुकून भी देती हैं। सोशल मीडिया ने इस भावना को साझा करने का मंच दे दिया है। खास बात यह है कि एआई ने पुराने दौर की तस्वीरों को नए अंदाज में प्रस्तुत करना आसान बना दिया है। इससे लोग सिर्फ अपनी यादें ताजा नहीं कर रहे, बल्कि उन्हें दूसरों के साथ साझा करके उस दौर से भावनात्मक जुड़ाव भी महसूस कर रहे हैं।
शकुंतला दुल्हानी, असिस्टेंट प्रोफेसर साइकोलॉजी, दुर्गा कॉलेज