
Flight Fare Hike: प्रदेश में विमान ईंधन (एटीएफ) पर देश में सबसे कम वैट होने के बावजूद त्योहारी सीजन में हवाई सफर तीन गुना तक महंगा हो गया है। नवरात्र, दशहरा और दीपावली के इस पावन पर्व पर जब लोग अपनों के बीच पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं, तब विमानन कंपनियों ने मनमाने तरीके से किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी है।
रायपुर से दिल्ली, मुंबई, पुणे और कोलकाता जैसे प्रमुख मार्गों पर यात्रा करना आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ में वैट मात्र 4 प्रतिशत होने के कारण विमानन कंपनियों को देश का सबसे सस्ता ईंधन मिलता है, इसके बावजूद यात्रियों को इस राहत का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। त्योहारी मांग और डायनेमिक प्राइसिंग के नाम पर कंपनियों द्वारा किया जा रहा यह आर्थिक शोषण गंभीर चिंता का विषय है। विमानन कंपनियां 'डायनेमिक प्राइसिंग' का हवाला देकर दावा करती हैं कि किराया मांग के आधार पर तय होता है।
हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि एक ही दिन में पांच-पांच बार किराए में फेरबदल किया जा रहा है। सुबह दिखने वाला टिकट कुछ ही घंटों में कई गुना महंगा हो जाता है। इसके अलावा, टिकट रद्द या रिशेड्यूल कराने पर 3000 से 4500 रुपए तक भारी-भरकम कैंसिलेशन चार्ज वसूला जा रहा है।
विमल बाफना, प्रदेश उपाध्यक्ष, कैट के मुताबिक, लंबी दूरी आपात स्थिति में जाने के लिए फ्लाइट सबसे बेहतर विकल्प है। लेकिन, अक्सर त्योहारी हवाई किराया बढ़ने से यात्री हलाकान और परेशान हो रहे हैं। इस पर अंकुश लगाएं जाने की जरूरत है, ताकि यात्रियों को राहत दिलाए जा सकें।
अमर सिंग पंडेल, सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर के मुताबिक, त्योहारी सीजन के दौरान कॉर्पोरेट और व्यावसायिक यात्राओं की मांग अधिक रहती है। कंपनियां किराया बढ़ा देती है। बढ़ी हुई मांग के कारण कम कीमत वाले टिकट जल्दी बिक जाते हैं, जिससे केवल महंगे टिकट ही उपलब्ध रह जाते हैं।