रायपुर

आदिवासी वोटबैंक पर कांग्रेस की निगाहें, इसलिए इस बड़े नेता का चाहिए हाथ

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम की कांग्रेस में वापसी होने वाली है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कार्यालय भी उनकी वापसी का संकेत दे चुका है। अब औपचारिकता ही शेष बची है। 

2 min read

मिथिलेश मिश्र/ रायपुर . वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम की कांग्रेस में वापसी होने वाली है। वापसी कब होगी, यह अभी तय नहीं है, लेकिन अब औपचारिकता ही शेष बची है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कार्यालय भी उनकी वापसी का संकेत दे चुका है।

छत्तीसगढ़ के कांग्रेस प्रभारी और सांसद पी.एल. पुनिया और राष्ट्रीय सचिव अरुण उरांव के साथ उनकी दो-तीन बार मुलाकात की है। इन बैठकों में कांग्रेस नेताओं ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी को उनकी जरूरत और उनको पार्टी की जरूरत बता दी है। नेताम पार्टी में पुराना सम्मान और आदिवासियों के हित का वादा चाहते हैं। कहा जा रहा है कि जल्दी ही उनकी मुलाकात राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से भी करा दी जाएगी। उसके बाद उनकी निलंबन वापसी की औपचारिकता पूरी की जाएगी।

ये भी पढ़ें

बड़ी खबर : कोलारस की जीत पर राहुल गांधी का ट्वीट, कहा- यह अंहकार और कुशासन की हार

नेताम बोले- वापसी में हिचक नहीं
अरविंद ने नेताम का कहना है कि भविष्य के नेक्सस को देखते हुए वे वापसी के फैसले से हिचकेंगे नहीं। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी कहते हैं कि अरविंद नेताम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। पार्टी में उनका बहुत सम्मान है। वे वापस आते हैं तो हर लिहाज से अच्छा होगा।

खतरे का संकेत है...
अरविंद नेताम ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि बहुत कठिन वक्त आने वाला है। सबसे बड़ा खतरा कॉरपोरेट के हाथ जमीन चले जाने का है। पूर्व की यूपीए सरकार ने जो भूमि अधिग्रहण कानून लाया था, वह कुछ ठीक था। वर्तमान एनडीए सरकार ने उसमें जैसा संशोधन करने की कोशिश की और छत्तीसगढ़ सरकार भू-राजस्व संहिता में संशोधन का जो बिल लेकर आई थी, वह खतरे का संकेत हैं। इसके मुकाबले कांग्रेस ठीक है। उन्होंने कहा कि पार्टी में आने के बाद भी सामाजिक आंदोलन चलता रहेगा।

संगमा का समर्थन कर निलंबित हुए थे नेताम
अरविंद नेताम को जून 2012 में कांग्रेस ने निलंबित कर दिया था। उन्होंने यूपीए की आेर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी के खिलाफ पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और आदिवासी नेता पी.ए. संगमा का समर्थन किया था। बाद में वे संगमा की पार्टी में शामिल हो गए थे। जनवरी 2017 में उन्होंने जय छत्तीसगढ़ पार्टी का पुनर्गठन किया।

ये भी पढ़ें

यूपी चुनाव: 7 चरणों में वोटिंग, 11 मार्च को गिनती, जानें कब कहां होगा मतदान

Published on:
02 Mar 2018 09:30 am
Also Read
View All