रायपुर

Bhupesh Baghel statement: पश्चिम बंगाल चुनाव पर भूपेश बघेल का कटाक्ष, बोले- बीजेपी के दावे पहले भी उल्टे पड़े

Bhupesh Baghel statement: पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर भूपेश बघेल ने बीजेपी के जीत के दावों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले भी ऐसे दावे किए गए थे, लेकिन नतीजे उल्टे रहे।
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Apr 27, 2026
भूपेश बघेल का कटाक्ष (photo source- Patrika)
भूपेश बघेल का कटाक्ष (photo source- Patrika)

Bhupesh Baghel statement: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दावों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने बयान में न सिर्फ बीजेपी की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए, बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन, संसदीय परंपराओं और संवैधानिक दायरे को लेकर भी गंभीर मुद्दे खड़े किए।

Bhupesh Baghel statement: बंगाल चुनाव पर तंज: “पहले भी दावे उल्टे पड़े”

भूपेश बघेल ने कहा कि बीजेपी पश्चिम बंगाल में जीत के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन इतिहास गवाह है कि इससे पहले भी ऐसे दावे किए गए थे और परिणाम पार्टी के पक्ष में नहीं आए। उनका इशारा पिछले चुनावों की ओर था, जहां बीजेपी ने आक्रामक प्रचार के बावजूद अपेक्षित सफलता हासिल नहीं की थी। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि बीजेपी की राजनीति अब केवल दावों और प्रचार तक सीमित रह गई है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। उनके अनुसार, जनता अब इन दावों को गंभीरता से नहीं लेती क्योंकि बार-बार ऐसे दावे विफल साबित हुए हैं।

“बीजेपी एसबीआई बन गई है” – बड़ा आरोप

अपने बयान में बघेल ने एक तीखा राजनीतिक रूपक इस्तेमाल करते हुए कहा कि पहले बीजेपी उन्हें और उनकी पार्टी को “एटीएम” कहती थी, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि खुद बीजेपी “एसबीआई” बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओडिशा, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में बीजेपी मिलकर संसाधनों का दोहन कर रही है और विकास कार्यों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

यह बयान सीधे तौर पर बीजेपी पर भ्रष्टाचार और संसाधनों के केंद्रीकरण के आरोप की ओर इशारा करता है। बघेल के अनुसार, सरकारों का प्राथमिक उद्देश्य जनता की सेवा होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी जा रही है।

विधानसभा के विशेष सत्र पर सवाल

भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर भी कई संवैधानिक और प्रक्रियात्मक सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सत्र बुलाने के लिए अनुमति ली गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि एजेंडा क्या है और किन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए:

  • क्या इस विशेष सत्र में निंदा प्रस्ताव (Condemnation Motion) लाया जा सकता है?
  • यदि लोकसभा में कोई प्रस्ताव पारित होता है, तो क्या उसका प्रभाव राज्य विधानसभा पर भी पड़ेगा?
  • क्या यह स्थिति केंद्र और राज्य के बीच टकराव की ओर इशारा करती है या यह सहमति का मामला है?

इन सवालों के जरिए बघेल ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच अधिकारों और सीमाओं को लेकर स्पष्टता आवश्यक है।

Bhupesh Baghel statement: “तीन बिल आए और तीनों गिर गए”

बघेल ने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार तीन महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई थी, लेकिन तीनों ही पारित नहीं हो सके। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन विधेयकों की विफलता पर विधानसभा में चर्चा होगी?
उनके अनुसार, यह केवल विधायी प्रक्रिया की विफलता नहीं है, बल्कि सरकार की नीति और तैयारी पर भी सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि आखिर ये बिल क्यों गिर गए और इसके पीछे क्या कारण थे।

केंद्र बनाम राज्य: संवैधानिक बहस

अपने बयान में बघेल ने एक बड़ा संवैधानिक मुद्दा उठाया—क्या राज्य विधानसभा में केंद्र सरकार से जुड़े विषयों पर चर्चा हो सकती है? उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस विषय पर किस स्तर पर चर्चा की जा सकती है। अगर यह सीमाएं स्पष्ट नहीं होंगी, तो इससे संवैधानिक टकराव की स्थिति बन सकती है।

Updated on:
27 Apr 2026 08:14 am
Published on:
27 Apr 2026 08:14 am
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