रायपुर

घर खरीदने वालों के लिए राहत! रेरा के दायरे में आए बिल्डर और सरकारी एजेंसियां, अब बिल्डर नहीं कर सकेंगे मनमानी

Real estate news Chhattisgarh: रेरा में पंजीयन के बिना अब कोई भी सरकारी या निजी निर्माण एजेंसी, बिल्डर या रियल एस्टेट एजेंट जमीन या मकान की बिक्री नहीं कर सकेगा।

2 min read
Jan 19, 2026
रेरा के दायरे में आए बिल्डर और सरकारी एजेंसि(photo-AI)

Real estate news Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) को सख्ती से लागू किए जाने के बाद फर्जी बिल्डरों और अवैध कॉलोनाइजरों पर बड़ी लगाम लगी है। रेरा में पंजीयन के बिना अब कोई भी सरकारी या निजी निर्माण एजेंसी, बिल्डर या रियल एस्टेट एजेंट जमीन या मकान की बिक्री नहीं कर सकेगा। इस व्यवस्था से आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है और उनकी गाढ़ी कमाई अब फर्जीवाड़े से सुरक्षित हुई है।

Real estate news Chhattisgarh: बिल्डर और एजेंसियों का पंजीयन अनिवार्य

रेरा के तहत निजी बिल्डरों के साथ-साथ सरकारी निर्माण एजेंसियों, नए प्रोजेक्ट्स और रियल एस्टेट एजेंटों का पंजीयन अनिवार्य किया गया है। राजधानी रायपुर स्थित रेरा कार्यालय में सभी बिल्डरों और एजेंसियों का पंजीयन किया जा रहा है। पंजीयन के बाद संबंधित बिल्डर या एजेंसी को एक यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता है, जो उसकी आधिकारिक पहचान होता है।

विज्ञापनों में भी देना होगा रेरा नंबर

रेरा नियमों के अनुसार, बिल्डरों को अपने सभी विज्ञापनों, ब्रोशर और प्रचार सामग्री में पंजीयन नंबर का उल्लेख करना अनिवार्य होगा। इससे उपभोक्ता ऑनलाइन माध्यम से भी किसी प्रोजेक्ट या बिल्डर की वास्तविक स्थिति की जानकारी हासिल कर सकेंगे। रेरा में पंजीकृत प्रोजेक्ट्स को सुरक्षित माना जाएगा, जिससे धोखाधड़ी की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी।

वादों से मुकरने पर होगी सख्त कार्रवाई

रेरा बनने से पहले कई मामलों में बिल्डर एग्रीमेंट या ब्रोशर में किए गए वादों से मुकर जाते थे, जिससे विवाद और उपभोक्ताओं का आर्थिक नुकसान होता था। अब यदि कोई बिल्डर तय मानकों या वादों का उल्लंघन करता है, तो उपभोक्ता सीधे रेरा में शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत मिलते ही उसकी जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर बिल्डर का पंजीयन निरस्त कर जुर्माना लगाया जा सकता है।

तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान

गंभीर मामलों में रेरा एक्ट के तहत बिल्डर के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जा सकता है। इसके अंतर्गत तीन साल तक की सजा या पांच लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा तय समय पर निर्माण पूरा नहीं करने या ब्रोशर के अनुसार निर्माण न होने की स्थिति में बिल्डर को उपभोक्ता को ब्याज भी देना पड़ सकता है।

कोर्ट-कचहरी के झंझट से मिलेगी राहत

रेरा के गठन के बाद अब बिल्डरों और मकान खरीदारों के बीच होने वाले छोटे-बड़े विवादों का समाधान रेरा स्तर पर ही किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को कोर्ट या उपभोक्ता फोरम के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यह व्यवस्था आम लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।

सरकारी एजेंसियां भी रेरा के दायरे में

रेरा एक्ट के तहत सिर्फ निजी बिल्डर ही नहीं, बल्कि हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम जैसी सरकारी संस्थाओं को भी शामिल किया गया है। सभी आवासीय प्रोजेक्ट्स का पंजीयन अनिवार्य है और पंजीयन के बाद ही उनकी खरीदी-बिक्री या आवंटन किया जा सकेगा।

खरीदारों को फायदा ही फायदा

राजधानी रायपुर में पहले कई बिल्डर और कॉलोनाइजर कृषि भूमि को अवैध रूप से प्लॉट में बदलकर बेचते थे। रेरा लागू होने के बाद इस पर काफी हद तक अंकुश लगा है। बीते वर्षों में सस्ती दर पर फ्लैट और जमीन का झांसा देकर करोड़ों रुपए की ठगी करने वाली कंपनियों पर सरकार ने कार्रवाई की है। रेरा के प्रभावी क्रियान्वयन से अब ऐसी गड़बड़ियों पर रोक लगने लगी है।

उपभोक्ताओं के हित में बड़ा कदम

प्रदेश सरकार का कहना है कि रेरा का गठन आम उपभोक्ताओं को राहत देने और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से किया गया है। इससे न केवल फर्जी बिल्डरों पर नकेल कसी है, बल्कि मकान और जमीन खरीदने वालों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।

Updated on:
19 Jan 2026 12:38 pm
Published on:
19 Jan 2026 12:37 pm
Also Read
View All

अगली खबर