
Bus Fare Hike Demand: छत्तीसगढ़ में डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच बस संचालकों ने किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के पदाधिकारियों ने परिवहन मंत्री केदार कश्यप से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। महासंघ का कहना है कि डीजल, टायर, बीमा, मरम्मत और कर्मचारियों के वेतन सहित बस संचालन से जुड़े सभी खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में परिवहन व्यवसाय आर्थिक संकट से गुजर रहा है। महासंघ ने सामान्य बस किराए में 50 प्रतिशत और एसी बसों के किराए में 30 प्रतिशत तक वृद्धि की मांग की है।
छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष Syed Anwar Ali ने कहा कि प्रदेश में आखिरी बार सितंबर 2021 में बस किराए में बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद से संचालन लागत लगातार बढ़ती चली गई, लेकिन किराए में कोई संशोधन नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि बीते कुछ दिनों में डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे बस संचालकों की परेशानी और बढ़ गई है।
महासंघ के अनुसार केवल डीजल ही नहीं बल्कि बसों के चेचिस, बॉडी निर्माण, टायर, बीमा, मरम्मत, स्पेयर पार्ट्स और कर्मचारियों के वेतन तक में भारी वृद्धि हुई है। इसके अलावा परिवहन विभाग द्वारा समय-समय पर लागू किए गए नए सुरक्षा नियमों ने भी बस संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। फिटनेस जांच, सीट बेल्ट, स्पीड गवर्नर, पैनिक बटन और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट जैसे नियमों पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।
महासंघ ने सरकार से सामान्य यात्री बसों के किराए में 50 प्रतिशत और डीलक्स एवं एसी बसों के किराए में 30 प्रतिशत तक वृद्धि करने की मांग की है। पदाधिकारियों का कहना है कि मार्च 2025 की अधिसूचना के बाद यात्री किराए में लगभग 25 प्रतिशत तक कमी की गई थी, जबकि उसी दौरान डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं। इससे 90 प्रतिशत से अधिक बस ऑपरेटर आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं।
महासंघ ने उदाहरण देते हुए बताया कि रायपुर से जगदलपुर तक वर्तमान बस किराया करीब 600 रुपये है, जो बढ़ोतरी के बाद 700 से 750 रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं रायपुर से दुर्ग का वर्तमान किराया लगभग 50 रुपये है, जो बढ़कर 75 रुपये तक हो सकता है। यदि सरकार मांग स्वीकार करती है तो प्रदेशभर के कई रूटों पर किराए में बदलाव देखने को मिल सकता है।
महासंघ ने सरकार से यह भी मांग की है कि यात्री किराए को डीजल की कीमतों से जोड़ते हुए स्थायी नियम बनाया जाए, ताकि भविष्य में डीजल महंगा या सस्ता होने पर उसी अनुपात में किराए में संशोधन किया जा सके। बस संचालकों का कहना है कि इससे यात्रियों और परिवहन व्यवसाय दोनों के लिए पारदर्शी व्यवस्था तैयार होगी।
बस किराया बढ़ाने की मांग के बाद अब यात्रियों की नजर राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है। यदि किराया बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है तो इसका सीधा असर आम यात्रियों की जेब पर पड़ सकता है, खासकर रोजाना सफर करने वाले लोगों पर।