राज्यपाल बलरामजी दास टंडन ने गजब की मिसाल पेश की है। दरअसल, राज्यपाल बलराम दास टंडन ने अपना बढ़ा हुआ वेतन लेने से साफ इंकार कर दिया।
रायपुर. छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजी दास टंडन ने गजब की मिसाल पेश की है। दरअसल, राज्यपाल बलराम दास टंडन ने अपना बढ़ा हुआ वेतन लेने से साफ इंकार कर दिया। एक ओर राज्यपाल के इस फैसले की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं। वहीं राज्यपाल का बढ़ा हुआ वेतन न लेने का फैसला देश के दूसरे राज्यों के राज्यपाल, एमपी-एमएलए और प्रशासनिक अफसरों के लिए सीख की तरह है।
बतादें कि हाल ही में राज्यपालों के वेतन में की गई वृद्धि और एरियर्स की राशि को नहीं लेने का निर्णय लिया है। इस संबंध में राज्यपाल टंडन ने छत्तीसगढ़ के महालेखाकार को मई 2018 को पत्र लिखकर पुराना वेतनमान 1 लाख 10 हजार रुपए ही लेने की इच्छा जताई है।
बढ़ा हुआ वेतन लेने से किया इंकार
राज्यपाल के पत्र के आधार पर उनका वेतन 1 लाख 10 हजार ही करने पर महालेखाकार द्वारा सहमति प्रदान की गई है। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने मार्च 2018 में जारी राजपत्र के अनुसार राज्यपालों के वेतन में वृद्धि की गई है, जो 1 जनवरी 2016 से देय होगी। पूर्व में यह वेतन 1 लाख 10 हजार रुपए था, जिसे बढ़ाकर 3 लाख 50 हजार रुपए किया गया है।
जिसका लाभ राज्यपाल बीएल दास टंडन को भी मिलना है, लेकिन उन्होंने इसका लाभ लेने से साफ इंकार कर दिया। साथ ही उन्होंने एरियर की राशि लेने से भी इंकार कर दिया है। बतादें कि राज्यपाल बलराम दास टंडन समय-समय पर मानव कल्याण के लिए लगातार कार्य करते रहते हैं। बलराम दास टंडन को वर्ष 2014 में छत्तीसगढ़ का राज्यपाल बनाया गया था।