CG News: छत्तीसगढ़ की तत्कालीन राज्यपाल अनुसुइया उइके द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। कोतवाली थाने में भी उसके खिलाफ धोखाधड़ी का एक अन्य मामला दर्ज है।
CG News: छत्तीसगढ़ पुलिस ने धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में आरोपी अजय वर्मा को छिंदवाड़ा से गिरतार किया है। वर्ष 2019 में दर्ज प्रकरण में आरोपी पर तत्कालीन राज्यपाल अनुसुइया उइके के लेटर पैड के गलत इस्तेमाल का आरोप है। पुलिस के अनुसार अजय वर्मा तब से फरार चल रहा था।
छत्तीसगढ़ पुलिस ने कोतवाली पुलिस के सहयोग से आरोपी को लालबाग स्थित उसके निवास से पकड़ा है। कोतवाली थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी ने बताया कि खुद को महामंडलेश्वर कहने वाला अजय वर्मा उर्फ बाबा अजय रामदास के खिलाफ लंबे समय से भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज था। छत्तीसगढ़ की तत्कालीन राज्यपाल अनुसुइया उइके द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। कोतवाली थाने में भी उसके खिलाफ धोखाधड़ी का एक अन्य मामला दर्ज है।
43 वर्षीय अजय वर्मा मूलत: छिंदवाड़ा जिले के चौरई तहसील के घोघर गांव का निवासी है। वह रामटेक में पीठाधीश्वर बना और बाद में दिगंबर अखाड़े से जुड़ गया। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान उसे दिगंबर अखाड़े की ओर से महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई थी। हालांकि, बाद में अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी। चौरई में कथा आयोजन के दौरान उसने विधानसभा चुनाव के लिए टिकट की मांग कर राजनीतिक हलकों में भी सुर्खियां बटोरी थीं।
यह मामला वर्ष 2019 का है, जब तत्कालीन राज्यपाल अनुसुइया उइके ने रायपुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके लेटर पैड का दुरुपयोग कर राजनीतिक पदाधिकारियों को पत्राचार किया गया है। जांच में सामने आया कि अजय रामदास वर्मा ने कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर ये पत्र जारी किए थे, जिनकी जानकारी राज्यपाल या उनके स्टाफ को नहीं थी। राइटिंग एक्सपर्ट की जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर रायपुर पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया और आरोपी की तलाश शुरू की थी।
CG News: अजय वर्मा के खिलाफ छिंदवाड़ा के कोतवाली थाने में भी एक धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। पेंशनर्स कॉलोनी निवासी मुकुट बिहारी सक्सेना (72) ने मई 2016 में शिकायत की थी कि अजय वर्मा ने उनसे प्लॉट की ऋण पुस्तिका बनवाने के नाम पर 75 हजार रुपए लिए थे, लेकिन न तो ऋण पुस्तिका सौंपी गई और न ही राशि लौटाई गई। जांच के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ भी धारा 420 के तहत प्रकरण दर्ज किया था।