पिछले कुछ विधानसभा चुनावों से साफ है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल महिलाओं को मौका देने से कतराते रहे हैं।टिकट देने के मामले में तो भाजपा, कांग्रेस से भी पीछे रही है।
रायपुर/भिलाई. प्रदेश स्तरीय महिला कार्यकर्ता सम्मेलन में जुटी भीड़ से गदगद राज्य सभा सदस्य और भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय ने कहा है कि पार्टी इस बार चुनाव में 33 प्रतिशत महिलाओं को मौका दे सकती है। जबकि पिछले कुछ विधानसभा चुनावों से साफ है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल महिलाओं को मौका देने से कतराते रहे हैं।टिकट देने के मामले में तो भाजपा, कांग्रेस से भी पीछे रही है।
पिछले चार विधानसभा चुनाव के नतीजे पर गौर करें तो स्पष्ट है कि संभाग की 20 सीटों पर महिला विधायकों की संख्या 2 से बढ़कर मात्र 4 हुई है। संभाग से 1998 के चुनाव में दो, 2003 में मात्र एक, 2008 में 3 और 2013 के चुनाव में 4 महिला विधायक निर्वाचित हुईं।
जहां तक महिलाओं को अवसर देने की बात है तो भाजपा, कांग्रेस से भी फिसड्डी रही है। 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने 5 लोगों को मौका दिया, जिनमें दो डौंडीलोहारा से अनिला भेडिय़ा और मोहला-मानुपर से तेजकुंवर नेताम विजयी रहीं। जबकि भाजपा ने सिर्फ दो महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा और दोनों चुनाव जीत गई।
दुर्ग ग्रामीण से रमशीला साहू और डोंगरगढ़ से सरोजनी बंजारे चुनाव जीतने में सफल रहीं। इससे पहले 2008 के चुनाव में भाजपा ने मात्र तीन महिला दावेदरों को मौका दिया था। इनमेंं वैशाली नगर से सरोज पांडेय और डौंडीलोहारा से नीलिमा सिंह टेकाम विधायक निर्वाचित हुईं।
...तो सात सीटें होंगी महिलाओं के खाते में
जैसा कि भाजपा 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं को देने का दम भर रही है ऐसा हुआ तो संभाग की 20 में से 7 सीटें महिला उम्मीदवारों के खाते में चली जाएंगी।
दुर्ग जिले की स्थिति
दुर्ग जिले के 6 विधानसभा सीटों में मात्र दो दुर्ग ग्र्रामीण और वैशाली नगर से ही महिला दावेदारों की चर्चा है। दुर्ग ग्र्रामीण में भाजपा से मंत्री रमशीला साहू एक बार फिर स्वभाविक दावेदार हैं। यहां ्रसे जिला पंचायत अध्यक्ष माया बेलचंदन भी चुनाव लडऩे के इच्छुक हैं।
वहीं कांग्रेस में पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर की दावेदारी एक बार फिर पुख्ता मानी जा रही है। वैशाली नगर में कांग्रेस से पूर्वमहापौर नीता लोधी ने दावेदारी की हे। बाकी दुर्ग शहर, भिलाई नगर, पाटन और अहिवारा में दोनों ही दलों से महिलाएं अब तक प्रबल दावेदार के रूप में सामने नहीं आई हैं।