
CGRERA Action: छत्तीसगढ़ में (CGRERA) ने रियल एस्टेट नियमों का पालन नहीं करने पर बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने “गोदरेज प्रॉपर्टीज रेसिडेंशियल प्लॉट्स” परियोजना के प्रमोटर पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जांच में सामने आया कि परियोजना का रेरा पंजीयन कराए बिना ही उसका विज्ञापन और प्रचार किया जा रहा था। इसके बाद CGRERA ने परियोजना का रेरा पंजीयन होने तक किसी भी तरह की बुकिंग, बिक्री और मार्केटिंग गतिविधियों पर रोक लगा दी है। प्राधिकरण ने लोगों से भी निवेश करने से पहले रेरा पंजीयन की जानकारी जांचने की अपील की है।
प्राधिकरण की जांच में पाया गया कि संबंधित परियोजना का रेरा पंजीयन कराए बिना ही सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से प्लॉट्स का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। परियोजना की कीमतों और अन्य जानकारियों को सार्वजनिक रूप से साझा कर संभावित ग्राहकों को आकर्षित किया जा रहा था, जो रेरा अधिनियम के प्रावधानों के खिलाफ है।
रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के अनुसार किसी भी रियल एस्टेट परियोजना का विज्ञापन, विपणन या विक्रय करने से पहले उसका रेरा में पंजीयन होना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य खरीदारों को सुरक्षित और पारदर्शी निवेश का अवसर देना है। बिना पंजीयन किसी भी परियोजना का प्रचार करना कानूनन प्रतिबंधित है।
CGRERA का कहना है कि यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को संभावित जोखिमों से बचाने के लिए की गई है। बिना पंजीयन वाली परियोजनाओं में निवेश करने पर खरीदारों को भविष्य में कानूनी और वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में प्राधिकरण लगातार निगरानी रख रहा है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक परियोजना को रेरा से वैध पंजीयन प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार की बुकिंग, बिक्री, मार्केटिंग या निवेश संबंधी गतिविधियां नहीं की जा सकतीं। आदेश का उल्लंघन होने पर आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
CGRERA ने आम लोगों और संभावित गृह खरीदारों से अपील की है कि किसी भी प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले उसकी रेरा पंजीयन स्थिति की जांच अवश्य करें। केवल पंजीकृत परियोजनाओं में निवेश करने से धोखाधड़ी और भविष्य की कानूनी जटिलताओं से बचा जा सकता है।
इस कार्रवाई को रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि नियमों की अनदेखी करने वाले प्रमोटरों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्राधिकरण का कहना है कि पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।