
रायपुर@राहुल जैन। Chhattisgarh Export Promotion Policy 2026-30: छत्तीसगढ़ अब सिर्फ देश के लिए चावल, स्टील और खनिज उपलब्ध कराने वाला राज्य नहीं, बल्कि अपने स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को दुनिया के बाजार तक पहुंचाने की तैयारी में है। पिछले दिनों मंत्रिमंडल ने छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को मंजूरी दी है। नीति में वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में मार्च 2030 तक राज्य से होने वाले वस्तु निर्यात को दोगुना करने और देश के कुल वस्तु निर्यात में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही कई छूट के अहम प्रावधान भी किए गए हैं।
निर्यात क्रेडिट इंश्योरेंस के लिए 5 लाख रुपए, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए 2 लाख रुपए और छत्तीसगढ़ के आईसीडी (इन्लैंड कंटेनर डिपो) के उपयोग पर निर्यात लॉजिस्टिक्स के लिए 20 लाख रुपए तक सहायता मिलेगी। यूनिट से आईडीसी तक शुरुआती परिवहन लागत का 50 फीसदी भी सहयोग मिलेगा। सरकार का लक्ष्य स्थानीय उत्पादों के साथ पर्यटन-आईटी और सेवाओं को भी वैश्विक बाजार से जोड़ा जाए।
नीति में ओडीओपी (एक जिला, एक उत्पाद) और जीआई उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग और निर्यात पैकेजिंग के लिए 15 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान है। पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को पंजीकरण लागत का 75 फीसदी सहयोग मिलेगा। जीआई आवेदन/पंजीयन के लिए 2 लाख रुपए तक की सहायता भी दी जाएगी। खास बात यह है कि बस्तर और सरगुजा संभाग में स्थापित उद्यमों के साथ महिला उद्यमियों, एससी-एसटी, भूतपूर्व सैनिक, अग्निवीर, नक्सल प्रभावित क्षेत्र और दिव्यांगजन से जुड़े निर्यातकों को सभी प्रोत्साहनों पर 10 फीसदी अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
नई नीति में सरकार ने निर्यात को बड़े उद्योगों तक सीमित रखने के बजाय छोटे उद्यमियों को भी इससे जोड़ने की कोशिश की है। निर्यात क्रेडिट इंश्योरेंस के लिए 5 लाख रुपए, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए 2 लाख रुपए और यूनिट से आईसीडी तक शुरुआती परिवहन लागत का 50 फीसदी भी सहयोग मिलेगा। इसका सीधा असर उन छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है जो उत्पाद तैयार तो करते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार, पैकेजिंग, प्रमाणन, परिवहन और डिजिटल बिक्री की लागत के कारण निर्यात शुरू नहीं कर पाते।
नीति में एक्सपोर्ट इंटेलिजेंस सेल बनाने का प्रावधान किया गया है। यह सेल अलग-अलग देशों में उत्पादों की मांग, शुल्क, गैर-शुल्क बाधाओं और मुफ्त व्यापार समझौता से जुड़े अवसरों की जानकारी देगा। निर्यात प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, गुणवत्ता मानकों और प्रमाणन को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेने के लिए भी निर्यातकों को सहायता दी जाएगी। यानी नीति का जोर केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने की पूरी श्रृंखला तैयार करने पर है।
यह बदलाव छत्तीसगढ़ के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी बना सकता है। किसान उत्पादक समूह, छोटे कारोबारी, महिला उद्यमी, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पाद बनाने वाले समूह यदि वैश्विक खरीदारों से जुड़ते हैं तो स्थानीय स्तर पर उत्पादन, पैकेजिंग, परिवहन, वेयरहाउसिंग, डिजिटल मार्केटिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी गतिविधियों की मांग बढ़ सकती है। हालांकि इन संभावित लाभों की वास्तविक मात्रा नीति के क्रियान्वयन और बाजार में उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर निर्भर करेगी।
41.21 लाख करोड़ का देश में कुल वस्तु निर्यात
0.19 लाख करोड़ का प्रदेश में पिछले साल कुल वस्तु का निर्यात
55.14 फीसदी छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी गैर-बासमती चावल के निर्यात की
20.05 फीसदी छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी लौह एवं इस्पात की